प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

'किस दुनिया में रहती है सरकार?'

योजना आयोग ने कहा है कि शहर में 31 रुपए और गांवों में 25 रुपए प्रति दिन कमाने वाले व्यक्ति को ग़रीब नहीं माना जा सकता.

लेकिन जानी मानी अर्थशास्त्री और खाद्द सुरक्षा पर बरसों से काम कर रही रितिका खेरा का कहना है कि बीपीएल से मिलने वाले कल्याणकारी फ़ायदों को ग़रीबों की कमाई के आधार पर आंकना सही नहीं है.

मनरेगा योजना का उदाहरण देते हुए रितिका खेरा ने कहा कि अगर मनरेगा के तहत काम करने वाला ग्रामीण प्रतिदिन 25 रुपए से ज़्यादा कमाता है. तो ऐसे में उससे बीपीएल कार्ड से मिलने वाले फ़ायदों को छीन लेना उचित नहीं होगा.

योजना आयोग की ओर से जारी की गई ग़रीबी की परिभाषा पर विश्लेषण सुनिए रितिका खेरा से. उनसे बात की बीबीसी संवाददाता शालू यादव ने.