हड़ताल से तेलंगाना में बिगड़े हालात

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Image caption तेलंगाना समर्थकों ने शनिवार और रविवार को तेलंगाना क्षेत्र से गुज़रने वाली रेलों को भी रोकने की घोषणा की है.

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए 10 दिनों से चल रही अनिश्चित कालीन हड़ताल से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं जबकि हड़ताली कर्मचारी और दूसरे तेलंगाना समर्थक रोज़ाना अपने आंदोलन को तेज़ करते जा रहें हैं.

गुरूवार को तेलंगाना के समर्थन में हड़ताली कर्मचारियों ने सचिवालय में राज्य के एक मंत्री श्रीधर बाबू का घेराव किया और उनसे इस्तीफ़ा देकर तेलंगाना समर्थकों का साथ देने के लिए दबाव डाला.

राज्य की राजधानी हैदराबाद में हड़ताल के कारण लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रहीं हैं. बिजली के संकट के कारण नगर में बुधवार से दो घंटों की बिजली कटौती लागू कर दी गई है.

नगर में बसों की हड़ताल का गुरुवार को पांचवा दिन है और बुधवार से नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर दी हैं, जिससे कूड़ा करकट उठाने का काम भी बंद हो गया है.

बिजली विभाग के उन कर्मचारियों ने भी बुधवार से हड़ताल कर दी है, जो बिल की वसूली का काम करते थे जिससे सरकार की आय पर और भी बुरा असर पड़ता दिखाई दे रहा है.

हड़ताली कर्मचारियों ने शनिवार और रविवार को तेलंगाना क्षेत्र से होकर गुज़रने वाली सभी ट्रेनों को रोकने का ऐलान किया है. इससे उत्तर भारत और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली रेलमार्ग भी बाधित हो जाएँगे.

'2700 करोड़ का घाटा'

राज्य के वित्त मंत्री रामनारायण रेड्डी ने यह कहकर हलचल मचा दी है कि हड़ताल के कारण अब तक राज्य को 2700 करोड़ रूपए का घाटा हो चुका है.

तेलंगाना के डॉक्टरों की संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि वे केवल आपात कालीन ड्यूटी ही करेंगे और आम रोगियों की चिकित्सा बंद कर देंगे.

आठ लाख से ज़्यादा कर्मचारियों, अध्यापकों और दूसरे लोगों की हड़ताल से तेलंगाना के सभी 10 ज़िलों में प्रशासन पहले से ही ठप पड़ा है और कोई काम काज नहीं हो रहा है.

कोयले का उत्पादन बंद हो जाने से राज्य को बिजली की गंभीर क़िल्लत का सामना करना पड़ा है. मुख्य मंत्री किरण कुमार रेड्डी ने प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह से संपर्क करके ज़्यादा बिजली और कोयले की आपूर्ति की अपील की है.

इधर सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों पर दबाव बढ़ाते हुए रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के 1300 से ज़्यादा कांट्रेक्ट कर्मचारियों को बर्ख़ास्त कर दिया है.

पुलिस सुरक्षा में कुछ बसें चलाने की सरकार की कोशिश उस समय महंगी पड़ी, जब हैदराबाद में एक बस लोगों की भीड़ में घुस गई.

इस घटना में एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर की मृत्यु हो गई. तेलंगाना समर्थकों का आरोप था कि इस बस के ड्राइवर को अनुभव नहीं था लेकिन हड़ताल को तोड़ने के लिए उसे गाड़ी चलाने दी गई.

इधर राजनीतिक मोर्चे पर भी सरगर्मी बढ़ गई है, क्योंकि तेलंगाना वादी सत्तारूढ़ कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों पर दबाव बढ़ा रहें हैं कि वो त्याग पत्र देकर केंद्र सरकार को जल्द फ़ैसले के लिए मजबूर करें.

तेलंगाना से संबंध रखने वाले मंत्रियों और सांसदों की बुधवार को अलग अलग बैठक हुई जिसमें स्थिति का जायज़ा लिया गया.

बैठक के बाद एक मंत्री जाना रेड्डी ने कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर अनुरोध कर रहे हैं कि केंद्र सरकार 30 सितंबर तक कोई फ़ैसला करें.

एक मंत्री वेंकट रेड्डी ने धमकी दी है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वे दो अक्तूबर से आमरण अनशन पर बैठेंगे.

इस बीच तेलुगू देसम के एक विधायक जी नागेश ने भी बुधवार को त्यागपत्र दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र हड़ताली कर्मचारियों के नेताओं के हवाले कर दिया और उनके आंदोलन के समर्थन की घोषणा की.

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