गुड़गांव टोलकर्मी हत्या मामले में दो गिरफ़्तार

 सोमवार, 26 सितंबर, 2011 को 13:00 IST तक के समाचार
गुड़गांव टोल प्लाज़ा

संदिग्ध विजय वीर सिंह यादव ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.

हरियाणा के खेरी धौला गांव के पास गुड़गांव टोल प्लाज़ा पर हुई टोलकर्मी की हत्या के मामले में गुड़गांव पुलिस ने दो संदिग्धों को ग़िरफ़्तार कर लिया है.

28 वर्षीय विजय वीर सिंह यादव ने 22 सितंबर की रात गुड़गांव टोल प्लाज़ा पर बैठे टोल टैक्स कर्मचारी की गोली मार कर हत्या कर दी थी, जबकि 24 वर्षीय मनजीत पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया गया है.

ये घटना तब हुई जब 22 वर्षीय टोल टैक्स कर्मचारी उमा शंकर पांडे ने शराब पी कर गाड़ी चला रहे विजय वीर सिंह से टोल टैक्स देने को कहा.

दरअसल खेरी धौला गांव के पास स्थित 35 गांवों के लोगों से टोल टैक्स नहीं लिया जाता है. टैक्स के बचने के लिए गांव के लोगों को गाड़ी का रेजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट दिखाना ज़रूरी है.

"पुलिस आमतौर पर दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर गश्त लगाती है क्योंकि वहां ट्रैफ़िक की समस्या बहुत ज़्यादा है. उस वक्त भी ये ही स्थिति थी, जब पुलिस गश्त पर थी. पुलिस का काम एक जगह तैनात रहना नहीं है."

हामिद अख़्तर, उत्तरी गुड़गांव के डीसीपी

विजय वीर का गांव ‘खो’ भी इसी दायरे में आता है, लेकिन टोल बूथ पर अपनी गाड़ी का रेजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट दिखाने के बजाय उन्होंने केवल अपनी लाइसेंस दिखाया, जिस पर उमा शंकर पांडे ने आपत्ति जताई और 27 रुपए की टैक्स राशि की मांग की.

टोल टैक्स भुगतान को लेकर दोनों के बीच बहस हुई, जिसके बाद विजय वीर सिंह ने उमा शंकर की गोली मार कर हत्या कर दी.

गुड़गांव पुलिस कमिश्नर एस एस देसवाल के मुताबिक़ वारदात के बाद विजय वीर का दोस्त मनजीत टोल बूथ पर आया और सबूत मिटाने की कोशिश की.

ये वारदात टोल प्लाज़ा पर लगे सीसीटीवी कैमरे में क़ैद हो गई, जिससे पुलिस को ग़िरफ़्तारियां करने में मदद मिली.

इस वारदात को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल हुई गाड़ी को पुलिस ने बरामद कर लिया है, जबकि कारतूस अभी तक बरामद नहीं हुआ है.

सुरक्षा इंतज़ाम

घटना को अंजाम देने के बाद विजय वीर ने अपने दोस्त मनजीत को टोल बूथ पर इस बात की पुष्टि के लिए भेजा कि उमा शंकर की मौत हो गई थी या नहीं.

ग़ौरतलब है कि न तो वारदात के समय टोल बूथ के पास पुलिस मौजूद थी, और न ही उस वक्त जब मनजीत वहीं का जायज़ा लेने पहुंचा.

जब उत्तरी गुड़गांव के डीसीपी हामिद अख़्तर से ये सवाल पूछा गया तो उनका कहना था, “पुलिस आमतौर पर दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर गश्त लगाती है क्योंकि वहां ट्रैफ़िक की समस्या बहुत ज़्यादा है. उस वक्त भी ये ही स्थिति थी, जब पुलिस गश्त पर थी. पुलिस का काम एक जगह तैनात रहना नहीं है.”

गुड़गांव पुलिस कमिश्नर ने पत्रकारों को बताया कि संदिग्धों को ढूंढ निकालने के लिए उन्होंने 17 टीमें बनाई, जिन्होंने आस पास के गांवों में जाकर तलाश की.

वारदात के समय विजय वीर सिंह ने शराब पी हुई थी और घटना को अंजाम देने के लिए उन्होंने .765 के कारतूस का इस्तेमाल किया.

कमिश्नर एस एस देसवाल बताया कि विजय वीर ने अपने गुनाह को कबूल कर लिया है और बाकी जानकारी के लिए पूछताछ जारी है.

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