आतंकवाद से हर जगह लड़ने की ज़रुरत - कृष्णा

एसएम कृष्णा

भारत ने अमरीका से कहा है कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ लडाई हर जगह लड़नी होगी और इसके लिए सभी को मिलकर इसके खात्मे के लिए काम करना होगा.

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने अमरीकी विदेश मंत्री से न्यूयॉर्क में मुलाकात के दौरान यह बातें कहीं.

कृष्णा ने मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मैंने कहा कि ये ज़रूरी है कि जिन देशों ने चरमपंथ से लड़ने का पक्का मन बना लिया है वह सारे देश इकट्ठा होकर एक साथ ही चरमपंथ के खिलाफ़ लड़ें तो बेहतर होगा. और चरमपंथ के ख़िलाफ़ अलग-अलग लड़ने के बजाए इससे हर जगह एक साथ लड़ने की ज़रूरत है. विदेश मंत्री क्लिंटन ने इस पर अपनी सहमति जताई.”

दोनों नेताओं की मुलाकात करीब 50 मिनट चली. हिलरी क्लिंटन के साथ अपनी मुलाकात को भारतीय विदेश मंत्री ने अच्छी और सकारात्मक बताया.

उनका कहना था कि चरमपंथ के खिलाफ़ लडाई पर गहन चर्चा हुई और दोंनो ही देश इस मुद्दे पर मिलकर काम कर रहे हैं.

हक़्क़ानी नेटवर्क पर भी हुई बात

हक्कानी नेटवर्क के बारे में भी दोंनो विदेश मंत्रियों ने चर्चा की. एसएम कृष्णा का कहना था, “हक्कानी नेटवर्क तो चरमपंथ से इस तरह जुड़ा है कि जब चरमपंथ पर बात होती है तो हक्कानी नेटवर्क पर तो चर्चा होनी ही होनी है. ”

कृष्णा ने कहा कि बातचीत के दौरान अमरीकी विदेश मंत्री ने हाल ही में दिल्ली में होने वाले बम धमाके की भी निंदा की है.

दोंनो नेताओं ने भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा की. औऱ दोंनो देशो के बीच विभिन्न मुद्दों पर साझेदारी और सहयोग को बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया. उन्होंने कहा कि बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा विश्व के अन्य मुददों पर भी चर्चा हुई.

इसके अलावा फ़लस्तीन, सीरिया, लीबिया के मुददों पर चर्चा हुई.

लेकिन इरान के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई. भारत के इरान के साथ संबंध अच्छे हैं और कुछ दिन पहले ही भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने इरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से मुलाकात भी की थी, जिसमें भारतीय प्रधान मंत्री ने इरानी राष्ट्रपति का इरान की यात्रा का आंमंत्रण भी स्वीकार कर लिया था.

फ़लस्तीन पर राय

फ़लस्तीन को संयुक्त राष्ट्र में सदस्यता दिए जाने के मुददे पर अमरीका औऱ भारत अलग अलग राय रखते हैं. विदेश मंत्री ने कहा कि अमरीका फ़लस्तीन के बारे में और अरब देशों जैसे लीबिया और सीरिया के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप न करने की भारत की राय अच्छी तरह जानता है.

एसएम कृषणा ने कहा, “प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में बहुत ही स्पष्ट शब्दों में फलस्तीन के मुददे पर और अरब देशों में हस्तक्षेप के मुद्दे पर भारत का रूख रख दिया था. औऱ अमरीका भारत के विदेश मंत्री से कोई अलग राय की उम्मीद नहीं रखता.”

अमरीका में भारत की दूत निरुपमा राव ने बाद में यह पुष्टि की कि अमरीका के साथ विस्तार से फ़लस्तीन के मुददे पर भी चर्चा हुई औऱ चूंकि भारत भी सुरक्षा परिषद का सदस्य है इसलिए आने वाले दिनों में फ़लस्तीन को राज्य का दर्जा दिए जाने के मुददे पर वोटिंग के बारे में भी संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत के साथ भारतीय दूत का बराबर संपर्क रहेगा.

इस हफ़्ते सुरक्षा परिषद फ़लस्तीन को राज्य का दर्जा दिए जाने संबंधी अर्जी पर चर्चा कर रही है. और उसके बाद उस पर वोटिंग भी हो सकती है जिसमें अमरीका ने उस प्रस्ताव को वीटो करने का पक्का इरादा ज़ाहिर किया है.

संबंधित समाचार