अफ़ज़ल गुरु पर चर्चा से पहले विधानसभा में हंगामा

अफ़ज़ल गुरु (फ़ाइल चित्री) इमेज कॉपीरइट agency
Image caption अफ़ज़ल गुरु को फाँसी की सज़ा सुनाई गई है

जम्मू कश्मीर विधानसभा में अफ़ज़ल गुरु की फाँसी की सज़ा माफ़ करने संबंधी प्रस्ताव से पहले हंगामा हुआ है. निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने कुछ दिन पहले विधानसभा में ये प्रस्ताव रखा था कि अफ़ज़ल गुरु को मानवीय आधार पर माफ़ किया जाना चाहिए.

प्रस्ताव पर चर्चा शुरु होने से पहले ही सदन में हंगामा तब शुरु हुआ जब कांग्रेस ने उन भाजपा सदस्यों की मौजूदगी पर एतराज़ जताया जिन्होंने हाल ही में क्रॉस वोटिंग की है. कांग्रेस के सदस्य इसके बाद गृभगृह तक आ गए और भाजपा नेताओं ने भी नारेबाज़ी शुरु कर दी.

इसके बाद स्पीकर को कार्यवाही थोड़ी देर के लिए स्थगित करनी पड़ी. विधायक इंजीनियर रशीद ने आरोप लगाया है कि ये सभी दलों की मिलीजुली साज़िश थी कि अफ़ज़ल गुरु से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा न हो सके.

मुख्य विपक्षी दल पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पहले ही प्रस्ताव को अपना समर्थन दे चुकी है लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अपना रुख़ स्पष्ट नहीं किया है. वहीं पैंथर पार्टी ने प्रस्ताव का विरोध किया है.

पिछले महीने तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया था जिसमें राजीव गांधी के हत्यारों की फाँसी की सज़ा माफ़ करने की अपील की गई थी.

इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी प्रधानमंत्री को एक पत्र लिख चुके हैं कि चरमपंथी हमले के अभियुक्त देवेंदर पाल सिंह भुल्लर की फाँसी की सज़ा माफ़ कर दी जाए.

विवाद

इस घटनाक्रम के बाद अब अफ़ज़ल गुरु का मामला जम्मू कश्मीर विधान में उठा है. दरअसल विवाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ट्विट के बाद शुरु हुआ.

तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव के बाद उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा था कि जम्मू कश्मीर विधानसभा में ऐसा प्रस्ताव पारित होता तो क्या उस पर भी ऐसी ही प्रतिक्रिया होगी. इसके बाद इस पर विवाद खड़ा हो गया था.

अफ़ज़ल गुरु से जुड़े प्रस्ताव में कहा गया है, "ये सदन प्रस्ताव करती है कि 13 दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद पर किए गए हमले के मामले में कथित रुप से शामिल होने के लिए फाँसी की सज़ा का सामना करने जा रहे अफ़ज़ल गुरु को मानवीय आधार पर माफ़ी दे दी जाए."

वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने अफ़ज़ल गुरु को संसद पर हमले के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई थी. 20 अक्तूबर 2006 को उन्हें सज़ा दी जानी थी. लेकिन उनकी पत्नी ने माफ़ी की अपील की थी जिसके बाद सज़ा टाल दी गई थी ताकि तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अपील पर निर्णय ले सकें.

इसके बाद नवंबर 2006 में अफ़ज़ल गुरू ने ख़ुद राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से क्षमादान की अपील की थी. ये याचिका गृह मंत्रालय को बढ़ा दी गई. 2011 में पाँच साल बाद गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति को अनुशंसा दी कि अफ़ज़ल गुरु की अपील ठुकरा दी जाए.

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