भाजपा जनता को भ्रमित कर रही है: कांग्रेस

Image caption कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि भाजपा में कुछ लोगों के प्रधानमंत्री बनने की इच्छा के चलते ये बयान दिए जा रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी पर जनता को दिगभ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि वो सरकार में अलग-अलग राय को मतभेद का रूप दे रही है.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा है कि, “भारतीय जनता पार्टी के बयान उसकी हताशा दर्शाते हैं, जनता ने उन्हें मत नहीं दिए तो अब वो ग़ैर-क़ानूनी तरीकों से सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है.”

सिंघवी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी वर्ष 2004 और 2009 की हार भुला नहीं पाई है, वो पहले भी सरकार गिराने के लिए अविश्वास प्रस्ताव ला चुकी है.

मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों का आरोप लगाते हुए कहा था कि विपक्ष 'समय से पूर्व ही अधीर' हो गया है और चुनाव 'थोपना चाहता है'.

इन आरोपों को ग़लत बताते हुए आज एक पत्रकार वार्ता में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि, “सरकार में नैतिकता और नेतृत्व का संकट है, साथ ही सरकार में विश्वसनीयता की भी कमी आई है, जिससे वो ख़ुद ही अस्थिर हो जाएगी.”

जेटली ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने सिर्फ तथ्यों को सामने रखा है, उसके पास तो ऐसे आंकड़े है ही नहीं कि वो सरकार गिरा सकें, चुनाव जल्दी होने की नौबत आएगी, तो उसके लिए सरकार खुद ज़िम्मेदार होगी.

मंत्रियों में मतभेद

उल्लेखनीय है कि जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में तत्कालीन वित्तमंत्री के रूप में पी चिदंबरम की भूमिका की जाँच होनी चाहिए.

वित्तमंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए एक पत्र के आधार पर ये याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है कि यदि तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम चाहते तो इस सरकार को हुए राजस्व के नुक़सान को रोका जा सकता था.

इस पत्र के आधार पर मौजूदा वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और गृह मंत्री पी चिदंबरम के बीच मतभेद की अटकलें तेज़ हो गईं और राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया.

विपक्ष की नेता सुष्मा स्वराज ने कहा कि न्यूयॉर्क से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री ने एक बार फिर अपने एक मंत्री, पी चिदंबरम का बचाव किया है, “जिससे ऐसा लगता है कि सरकार भ्रष्टाचार मिटाने की बजाय भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अपने मंत्रियों का बचाव करने की मुहिम में लग गई है.”

सीबीआई पर आरोप

इस याचिका के दायर होने के बाद सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले में पूर्व वित्तमंत्री और वर्तमान गृहमंत्री चिदंबरम की जाँच से इनकार कर दिया है. उसका कहना है कि सारे मामले की जाँच पहले ही हो चुकी है और अब नए सिरे से जाँच करने की कोई ज़रुरत नहीं है.

लेकिन सीबीआई पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि सीबीआई का सुप्रीम कोर्ट में चिदम्बरम की जांच की ज़रूरत से इनकार करना सवाल पैदा करता है.

उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों पर गाज गिरती है तो सरकार कार्रवाई करती है लेकिन जब कांग्रेस पार्टी की बारी होती है तो बचाव करती है.

इस पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि गृह मंत्री से जुड़े दस्तावेज़ के मामले में आपराधिक फ़ैसले और नीतिगत फ़ैसले का फ़र्क समझना ज़रूरी है.

उन्होंने कहा, "भारत की जांच एजंसी सीबीआई, किसी पार्टी के कहने पर किसी शख़्स से पूछताछ करने को मजबूर नहीं है, ये एजेंसी का अपना स्वायत्त कदम है और इसके सही या ग़लत होने का फ़ैसला अदालत कर सकती है."

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