तेलुगूदेसम के 32 विधायकों का इस्तीफ़ा

तेलंगाना क्षेत्र के विधायक
Image caption तेलंगाना क्षेत्र के 32 विधायकों ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया

आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य के लिए जैसे-जैसे आंदोलन तेज़ हो रहा है और तनाव बढ़ रहा है वैसे-वैसे राजनीतिक स्तर पर भी गर्मागर्मी बढ़ने लगी है.

बुधवार को एक अहम घटना में मुख्य विपक्षी तेलुगुदेसम के 32 तेलंगाना विधायकों ने विधानसभा से त्याग पत्र दे दिया.

उन्होंने सरकार से माँग की है कि वह तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए जल्द से जल्द एक विधेयक संसद में पेश करे.

यह छह महीने में दूसरी बार है जबकि तेलुगूदेसम के विधायकों ने इस्तीफ़ा दिया है.

इससे पहले फ़रवरी में तमाम दलों के 100 तेलंगाना विधायकों ने इस्तीफ़ा दिया था जिसे स्पीकर एन मनोहर ने यह कह कर रद्द कर दिया था कि वह भावावेश में उठाया गया क़दम था.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के 11 और तेलुगूदेसम के चार बाग़ी विधायक दूसरी बार त्याग पत्र स्पीकर को दे चुके हैं और अब तेलुगूदेसम के विधायकों के इस्तीफ़े के बाद कांग्रेस के मंत्रियों, विधायकों और सांसदों पर भी इस्तीफ़ा देने के लिए दबाव बढ़ेगा.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति पहले ही तेलंगाना के लोगों का आह्वान कर चुकी है कि वह गुरुवार को पूरे तेलंगाना में उन चुने हुए प्रतिनिधियों के घरों का घेराव करें जिन्होंने त्यागपत्र नहीं दिया है.

'हैदराबाद बिना नहीं'

इस बीच तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने यह कहकर हलचल पैदा कर दी है कि केंद्र सरकार एक ऐसे तेलंगाना राज्य की स्थापना पर विचार कर रही है जिसमें रायलसीमा क्षेत्र के दो ज़िलों कुर्नूल और अनंतपुर को भी शामिल किया जाएगा. मगर उन्होंने इस सुझाव को पूरी तरह से रद्द कर दिया है.

हैदराबाद में सरकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "चाहे तेलंगाना के लोगों को सिर कटवाना पड़े मगर वह हैदराबाद के साथ ही तेलंगाना को स्वीकार करेंगे उसके बिना नहीं."

चंद्रशेखर राव ने कहा कि मौजूदा आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक केंद्र सरकार तेलंगाना की घोषणा नहीं कर देती फिर चाहे उसमें कितना ही समय लग जाए.

उनका कहना था कि अगर अभी तेलंगाना के लोगों ने पैर पीछे खींच लिए तो तेलंगाना फिर कभी नहीं बन पाएगा.

तेलंगाना के कांग्रेसी मंत्रियों, विधायकों और सांसदों ने कांग्रेस के प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद से भेंट की और उन्हें हालात से अवगत कराते हुए जल्द से जल्द किसी फ़ैसले का अनुरोध किया.

कांग्रेस आलाकमान ने सलाह मशविरे के लिए जो समय माँगा था वह 30 सितंबर को समाप्त होने वाला है.

कांग्रेसियों को उम्मीद है कि आज़ाद जल्द ही कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी को रिपोर्ट पेश कर देंगे जिसके आधार पर पार्टी और सरकार कुछ फ़ैसला करेगी.

कांग्रेस से भी तेलंगाना के नेताओं ने धमकी दी है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह भी त्याग पत्र दे देंगे.

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