जयराम के सीबीआई जाँच के पत्र ने मायावती की परेशानी बढ़ाई

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Image caption विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंेत्री मायावती की परेशानियाँ बढ़ गई हैं

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय ग्राम विकास मंत्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री मायावती को महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना (मनरेगा) में कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई जाँच के बारे में पत्र लिखकर उनकी परेशानियाँ बढ़ा दी हैं.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री मायावती को चुनावों से पहले घेरने के लिए केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने ऐसा किया है.

केंद्र से विकास योजनाओं के लिए मिलने वाले धन में कथित भ्रष्टाचार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का एक मुख्य राजनीतिक मुद्दा है.

टीकाकार मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश की आम जनता को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश में विकास के लिए विभिन्न परियोजनाओं के लिए जो धन देती है उसका बड़ा हिस्सा सरकार में बैठे लोग खा जाते हैं और ग़रीबों या आम जनता को उसका लाभ नही मिलता.

इसी रणनीति के तहत कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में हुए कथित भ्रष्टाचार को उजागर करने के ख़ुद लखनऊ में मिशन के दफ़्तर गए थे और जन सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी.

अदालत के आदेश से ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के सीएमओ और डिप्टी सीएमओ हत्याकांड की केंद्रीय जाँच ब्यूरो की जांच चल रही है जिसमें उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के फंसने की आशंका जताई गई है.

'22 जाँच रिपोर्टें, कार्रवाई नहीं हुई'

अब केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने माया सरकार को एक और मुश्किल में डाल दिया है.

रमेश ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में याद दिलाया है कि उत्तर प्रदेश में मनरेगा योजना में सालाना 5000 करोड़ रुपए से अधिक धन केंद्र से आता है.

रमेश के अनुसार उत्तर प्रदेश में मनरेगा के धन में गबन के बारे में 22 जांच रिपोर्टें आ चुकी हैं लेकिन राज्य सरकार ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है.

रमेश के अनुसार कोई कार्रवाई न होने से यह संदेश गया है कि अफ़सर चाहे जितनी बेईमानी और गड़बडी करें लेकिन यदि उनको राजनीतिक संरक्षण मिलता है तो उनका कुछ नही बिगड़ेगा.

रमेश ने ये भी लिखा है कि अगर केंद्र सरकार इन गडबडियों के चलते उत्तर प्रदेश सरकार को धन का आबंटन बंद कर दे तो इससे भ्रष्ट अफ़सरों और उनके राजनीतिक आकाओं के गुनाहों की सज़ा लाखों ग़रीब मजदूरों को मिलेगी.

जयराम रमेश का मानना है कि इसलिए वह इस पूरे मामले की सीबीआई से गहन छानबीन कराना चाहते हैं.

रमेश ने मायावती से कहा है कि अगर राज्य सरकार कुछ छिपाना नही चाहती और उसका मन साफ़ है तो फिर सीबीआई जांच के लिए सहमति देने में कोई आपत्ति नही होनी चाहिए.

पिछले पांच सालों में केंद्र से उत्तर प्रदेश को मनरेगा के लिए 20,000 करोड़ रूपए मिले हैं. आरोप हैं कि केवल चालीस फ़ीसदी धन लोगों तक पहुंचता है.

सबको मालूम है कि मुख्यमंत्री मायावती सीबीआई के नाम से कितनी परेशान होती हैं और शायद इसीलिए उन्होंने तुरंत पलटवार नहीं किया है.

मनरेगा योजना के अधिकतर लाभार्थी ग्रामीण दलित, भूमिहीन खेतिहर मज़दूर और ग़रीब हैं.

लेकिन इस योजना में भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच से इनकार भी मायावती के लिए राजनीतिक परेशानी पैदा करेगा.

तब कांग्रेस को और ज़ोरदार तरीके से यह कहने को मौक़ा मिलगा कि मायावती और बहुजन समाज पार्टी की दिलचस्पी ग़रीबों की भलाई के बजाय भ्रष्ट अफ़सरों को बचाने की अधिक है.

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