दस्तावेज़ में मेरे विचार नहीं हैं: प्रणब

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Image caption प्रणब मुखर्जी के मंत्रालय ने ही वो दस्तावेज़ भेजा था जिसने चिदंबरम को कटघरे में खड़ा कर दिया है

2जी स्पेक्ट्रम विवाद को लेकर सरकार की बढ़ती परेशानी के बीच वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने गृहमंत्री पी चिदंबरम की उपस्थिति में एक बयान जारी किया है कि जिस दस्तावेज़ को लेकर विवाद है उसमें लिखी बातें उनके विचार नहीं हैं.

उनका कहना था कि सरकार ने अक्तूबर, 2003 में बनी नीति के आधार पर स्पेक्ट्रम का आवंटन किया था और वे इससे पूरी तरह से सहमत हैं.

उन्होंने इस विवादित दस्तावेज़ की यह कहकर उपेक्षा करने की कोशिश की कि कुछ मंत्रालय के अधिकारियों ने आपसी चर्चा करके इसे तैयार किया था और एक बैकग्राउंड पेपर की तरह प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा था और इसमें कई तरह निष्कर्ष निकाले गए हैं और व्याख्या की गई है.

प्रणब मुखर्जी के बयान के बाद पी चिदंबरम ने मीडिया से कहा कि वे प्रणब मुखर्जी के बयान से सहमत हैं.

दोनों मंत्रियों ने यह बयान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात के बाद जारी किया और इसे दोनों मंत्रियों के बीच शांति-समझौते के रूप में देखा जा रहा है.

पिछले एक हफ़्ते से यह स्पष्ट रूप से दिख रहा था कि दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने के बाद से गृहमंत्री चिदंबरम वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी से नाराज़ हैं.

सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने दोनों नेताओं से एक से अधिक बार मुलाक़ात की और यहाँ तक कि प्रणब मुखर्जी को सफ़ाई में मनमोहन सिंह को पत्र भी भेजना पड़ा.

क्या है दस्तावेज़ में?

सूचना के अधिकार के तहत हासिल हुए दस्तावेज़ को जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है और मांग की है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में पी चिदंबरम को गवाही के लिए बुलाया जाना चाहिए.

इस दस्तावेज़ के अनुसार वित्तमंत्रालय ने कहा है कि वित्तमंत्री रहते हुए पी चिदंबरम ने यदि 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए पर्याप्त प्रयास किए होते तो वर्ष 2001 के दामों पर लाइसेंस का वितरण रोका जा सकता था.

इस दस्तावेज़ में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर हुई विभिन्न बैठकों और विभिन्न मंत्रालयों के बीच हुए पत्राचार का ब्यौरा है.

ये दस्तावेज़ वित्त मंत्रालय, कैबिनेट सचिवालय, दूरसंचार मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने मिलकर तैयार किया है.

प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सफ़ाई दी थी और उसी को आज मीडिया के सामने दोहराया कि जो दस्तावेज़ वित्तमंत्रालय की ओर से भेजा गया था वह दरअसल अंतर-मंत्रालयीन पृष्ठभूमि दस्तावेज़ था जिसे कई विभागों की मदद से तैयार किया गया था.

प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि ये दस्तावेज़ इसलिए तैयार किया गया था ताकि यदि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में यदि किसी विभाग के अधिकारी को गवाही के लिए बुलाया जाए तो सभी का पक्ष एक जैसा ही हो.

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