उन्नीस साल बाद 269 लोग दोषी पाए गए

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Image caption तमिलनाडु की पुलिस पर गंभीर आरोप लगे थे

तमिलनाडु में धरमपुरी ज़िले की एक अदालत ने 19 साल पहले वचाती गाँव में हुए अत्याचारों के लिए पुलिस और वन विभाग के 269 लोगों को दोषी ठहराया है.

इसमें सामूहिक बलात्कार के मामले में 17 लोग दोषी पाए गए हैं.

इस मामले में सभी 269 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था, जिनमें 108 पुलिसकर्मी, 155 वन अधिकारी और छह राजस्व अधिकारी शामिल थे.

इन अभियुक्तों में से अब 215 लोग ज़िंदा बचे हैं और बाक़ी लोगों की इस लंबी अवधि में मौत हो चुकी है.

आरोप है कि तस्करी के चंदन की लकड़ी की तलाशी करने के क्रम में पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने ये अत्याचार किया था.

केंद्रीय जाँच ब्यूरो के अनुसार 20 जून 1992 को 269 अधिकारी वचाती में घुसे और वहाँ उन्होंने पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को पीटने के अलावा झोपड़ियाँ तहस-नहस कर दी.

उस दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया था और कई आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया.

पुलिसकर्मियों पर ये आरोप था कि उन्होंने क़रीब 100 महिलाओं को प्रता़ड़ित भी किया, इनमें से कई महिलाएँ गर्भवती भी थी.

आरोप

सभी अधिकारियों ने पहले इस तरह की किसी भी कार्रवाई में शामिल होने से इनकार किया था.

शुरू में स्थानीय पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया था, लेकिन अदालत के निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई की.

फिर वामपंथी दलों और सामाजिक संस्थाओं के दबाव के बाद मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो को सौंप दी गई थी.

जाँच ख़त्म होने के बाद पूरी कार्रवाई काफ़ी धीमी गति से चली.

सोमवार को ही अदालत को अपना फ़ैसला सुनाना था, लेकिन कई अभियुक्त उस दिन अदालत में मौजूद नहीं थे, इसलिए अदालत ने गुरुवार तक के लिए फ़ैसला टाल दिया था.

इन दोषियों को कितनी सज़ा मिलेगी जल्दी ही इसकी भी घोषणा होगी.

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