रक्षा मंत्री एंटनी रूस में

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Image caption भारत रूसी सैनिक साज़ोसामान का सबसे बड़ा ख़रीदार है

भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर रूस पहुँच गए हैं.

उनकी यात्रा के दौरान भारत और रूस के रक्षा समझौतों की समीक्षा की जाएगी. अपनी यात्रा के दौरान एंटनी रूस के विदेश मंत्री एनातोली सेरदेकोव से मिलेंगे.

रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों नेता रक्षा क्षेत्र के कई अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत करेंगे.

भारत रूस के सैनिक साजोसामान का सबसे बड़ा ख़रीदार है.

एके एंटनी की रूस यात्रा को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगले दो-तीन वर्षों में भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग के क्षेत्र में काफ़ी लेनदेन होना है.

बताया गया है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्री अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास के मुद्दे पर विचार विमर्श करेंगे. इस दशक के अंत तक रूस से भारत लगभग 250 अति आधुनिक लड़ाकू विमान ख़रीदेगा. इस वर्ष के अंत में दस वर्ष के लीज़ पर भारत को रूस से के-152 लड़ाकू पनडुब्बियाँ मिलनी हैं जिसके लिए सात वर्ष पूर्व एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे.

इसके अलावा विमानवाही पोत एडमिरल गोर्श्वकोव दिसंबर 2012 को भारत को सौंपा जाना है, इस समय विमानवाही पोत के आधुनिकीकरण का काम चल रहा है.

इस विमानवाही पोत को भारत ने रूस से 2004 में ख़रीदा था लेकिन उसे भारत को सौंपने में चार साल की देरी हो चुकी है.

इसके अलावा वर्ष 2013 के अंत में भारत को रूस से 80 एमआई-17 लड़ाकू हेलिकॉप्टर भी मिलने हैं.

भारत और रूस के रक्षा मंत्री ताजिकिस्तान में स्थित अयनी एयरबेस के साझा इस्तेमाल की संभावना पर भी विचार करेंगे. अयनी एयरबेस के आधुनिकीकरण का काम भारतीय वायुसेना की मदद से किया गया है. मॉस्को पहुँचने से पहले एके एंटनी का विमान कुछ देर के लिए एयनी एयरबेस पर भी उतरा था जिसे टेक्निकल स्टॉप ओवर कहा जा रहा है.

भारत और रूस के बीच मौजूदा रक्षा सहयोग समझौता 2020 तक के लिए है.

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