'संजीव भट्ट की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए'

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Image caption संजीव भट्ट की ज़मानत याचिका पर सुनवाई टाल दी गई है

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुज़रात सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि निलंबित और गिरफ़्तार आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और उनके परिवारजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

संजीव भट्ट की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी ने संजीव की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे और कहा था कि उन्हें डर है कि संजीव की हिरासत में ही हत्या कर दी जाएगी.

उन्होंने इस संबंध में गृह मंत्री को पत्र लिखा था. इसी पत्र पर गृह मंत्रालय ने गुजरात सरकार से कहा है कि वो संजीव भट्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करें.

इस बीच गुजरात की स्थानीय अदालत ने गिरफ्तार आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की रिमांड संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है.

संजीव भट्ट उन पुलिस अधिकारियों में से है जिन्होंने गुज़रात दंगों के मामले में राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है.

संजीव भट्ट के ख़िलाफ़ गुजरात पुलिस ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने एक मातहत पर दबाव डाला कि वो सुप्रीम कोर्ट के एमीक्स क्यूरे के सामने ग़लत हलफनामा दायर करे.

भट्ट की ज़मानत याचिका पर कोर्ट ने दोनों पक्षों के बयान सुने और उसके बाद फ़ैसला सुरक्षित रखा.

सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद संजीव भट्ट ने कहा कि वो सात अक्तूबतर को कोर्ट में पेश होना चाहेंगे लेकिन जज ने कहा कि फ़ैसला सुनाने के दौरान उनकी उपस्थिति ज़रुरी नहीं है.

अदालत ने भट्ट के सामने ये प्रस्ताव रखा था कि वो पुलिस रिमांड पर तीन घंटे के लिए जाएं जिसके बाद उन्हें ज़मानत दे दी जाएगी लेकिन भट्ट ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए नहीं माना कि वो दलालों पर यकीन नहीं कर सकते.

इससे पहले कोर्ट ने संजीव भट्ट को पुलिस रिमांड में ले जाने की पुलिस की याचिका को खारिज़ कर दिया था और संजीव को न्यायिक हिरासत में भेजा था.

इस बीच संजीव भट्ट ने ज़मानत के लिए सत्र न्यायालय में अर्ज़ी दी है जिस पर अभी फैसला नहीं आया है.

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