इतिहास के पन्नों में 6 अक्टूबर

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि अक्टूबर 6 ही के दिन मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या कर दी गई थी. साल 1973 में इसी दिन अरब इसरायली युद्ध आरंभ हुआ था.

1981 : मिस्र के राष्ट्रपति सादात का क़त्ल

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Image caption सादात की हत्या के बार देश के उप राष्ट्रपति होस्नी मुबारक मिस्र के राष्ट्रपति बने.

इसी दिन मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात की सरे आम हज़ारों लोगों के सामने उस समय हत्या कर दी गई जब वो सालान फ़ौजी परेड के दौरान आसामन पर टकटकी लगाये जंगी जहाज़ों का प्रदर्शन देख रहे थे. सादात पर ज़मीन से उनके ही सैनिकों ने हथगोले फेंके. हथगोलों के फटने के फ़ौरन बाद सामने से एक फ़ौजी ट्रक से सैनिक बाहर कूदे और उन्होंने गोलियां बरसाना शुरू कर दिया.

जब तक सादात के सैनिकों को समझ में आता और वो जवाबी हमला करते तब तक क़रीब दस लोग ज़मीन पर पड़े हुए थे.

इस हमले में कई विदेशी कूटनयिक मारे गए व कई और लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. मिस्र में सदात की हत्या के बाद तत्काल आपातकाल लागू कर दिया गया.

अनवर सादात 1948 में पश्चिम एशिया में इसरायल को मान्यता देने वाले पहले राष्ट्राध्यक्ष थे.

राष्ट्रपति सादात इसरायल को लेकर अपनी नीति के कारण पश्चिमी देशों में तो काफ़ी पसंद किए जाते थे लेकिन इसी कारण से वो अरब देशों में बहुत ही नापसंद किए जाते थे.

सादात की हत्या के बार देश के उप राष्ट्रपति होस्नी मुबारक मिस्र के राष्ट्रपति बने.

1973 : संयुक्त अरब फ़ौजों का इसरायल पर हमला

Image caption इसी दिन इसरायल के ऊपर मिस्र और सीरिया के फ़ौजों ने दो तरफ़ा हमला शुरू कर दिया था.

इसी दिन इसरायल के ऊपर मिस्र और सीरिया के फ़ौजों ने दो तरफ़ा हमला शुरू कर दिया था.

इसरायल के दक्षिण की तरफ से मिस्री फ़ौजों ने हमला बोला तो उत्तर की तरफ से सीरियाई फ़ौजों ने धावा बोल दिया.

दोनों ही पक्षों ने दूसरे पक्ष के ऊपर लड़ाई शुरू करने का आरोप लगाया पर संयुक्त राष्ट्र के अधिकारीयों के अनुसार मिस्र और सीरिया के सैनिकों ने इसरायल की सीमा में पहले प्रवेश किया.

इसरायल के रक्षा मंत्री मोशे दयान ने देश को अपने संबोधन में कहा " हमें समझना चाहिए कि यह एक युद्ध है और हमसंख्या में अपने से कहीं मजबूत शत्रु से लड़ रहे हैं."

जिस दिन यह लड़ाई शुरू हुई वो यहूदियों के लिए धार्मिक रूप से अति महत्वपूर्ण दिन था. यहूदी इस दिन को पश्चाताप दिवस के रूप में मनाते हैं. वैसे तो ज़्यादातर यहूदी इस दिन को प्रार्थना और उपवास में बिताते हैं हैं लेकिन जैसे ही लड़ाई शुरू हुई लोग सीमा की तरफ़ लड़ने के लिए चल दीए.

इस लड़ाई में शुरुआत में मिस्र और सीरिया की फ़ौजों ने 1967 की लड़ाई के दौरान इसरायल के कब्ज़े में चली गए कई इलाकों को वापस हथिया लिया.

अरब जगत के कई देशों ने इस लड़ाई में पैसे और सिपाही मिस्र और सीरिया को उपलब्ध कराए पर आख़िरकार अमरीकी मदद और इसरायली फ़ौजी क़ाबलियत की वजह से अरब देशों को झुकना पड़ा.

अंत में अमरीकी मध्यस्थता के चलते इस युद्ध का अंत हुआ. अमरीकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के वजह से मिस्र को स्वेज़ नहर पर कब्जा मिला और सीरिया को 1967 में हारे हुए कुछ इलाकों का कब्ज़ा वापस मिला.

इस लड़ाई में दोनों ही पक्षों को भारी नुक़सान उठाना पड़ा. अनुमानित रूप से मिस्र और सीरिया को 8500 सैनिक मारे गए वहीं इसरायल को भी अपने क़रीब 6000 सिपाहियों से हाथ धोना पड़ा.

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