कुडनकुलम पर प्रधानमंत्री का जया को पत्र

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Image caption प्रधानमंत्री ने संयंत्र का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं से कहा कि देश को और तमिलनाडु को परमाणु ऊर्जा की ज़रूरत है.

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र को लेकर आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता से कहा है कि परियोजना पर काम करते हुए केंद्र सरकार 'लोगों की सुरक्षा और आजीविका' का पूरा ध्यान रखेगी.

प्रधानमंत्री ने जयललिता को पत्र लिखकर कडनकुलम संयंत्र की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे क़दमों का विवरण भेजा है और साथ ही इस संयंत्र के निर्माण के लिए मिली मंज़ूरी ज़िक्र किया है.

उन्होंने जयललिता से इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए सहयोग मांगा है.

इससे पहले कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों से प्रधानमंत्री ने मुलाक़ात की.

उन्होंने उनके मुद्दों पर विचार करने के लिए एक समिति के गठन का आश्वासन दिया है.

इस बीच परमाणु मामलों के विशेषज्ञ अनिल काकोडकर ने परमाणु संयंत्र को लेकर विरोध पर आश्चर्य प्रकट किया है.

आश्वासन

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में जयललिता को लिखा है कि सुरक्षा को लेकर भारत के परमाणु संयंत्रों का अब तक का रिकॉर्ड अच्छा रहा है.

उन्होंने कहा, “परमाणु ऊर्जा एक तरीका है जिससे हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकते हैं. केंद्र सरकार सुनिश्चित करेगा कि लोगों की सुरक्षा और आजाविका का ध्यान रखा जाए.”

मनमोहन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार फ़ुकुशिमा हादसे से उपजी चिंताओं को लेकर जागरुक है. उन्होंने कहा कि फ़ुकुशिमा के बाद उन्होंने सभी परमाणु संयंबों की सुरक्षा समीक्षा के आदेश दिए थे औऱ सरकार सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि भारतीय परमाणु बिजली निगम कुडनकुलम में स्थानीय लोगों के संपर्क में है और उनके लिए कई कार्यक्रम भी चलाए गए हैं.

उन्होंने अपने पत्र में लोकसभा में पेश किए गए परमाणु सुरक्षा नियामक प्राधिकार बिल 2011 की भी बात की.

समिति का गठन

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Image caption कुडनकुलम परमाणु संयंत्र पर विभिन्न पार्टियों के नेताओं और संयंत्र का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की.

उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को तमिलनाडु के कुडनकुलम ज़िले में परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं और विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और स्थानीय लोगों की चिंताओं को देखते हुए एक समिति के गठन की बात की.

दरअसल, स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और संयंत्र के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री दफ़्तर की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि क्योंकि उठाए गए मुद्दे तकनीकी हैं, इसलिए केंद्रीय सरकार विशेषज्ञों के एक छोटे सा दल गठित करेगी जो स्थानीय लोगों से बातचीत करेगा.

इस प्रक्रिया में राज्य सरकार को भी शामिल किया जाएगा.

वक्तव्य में साफ़ किया गया कि संयंत्र को अभी शुरू नहीं किया गया है और केंद्र सरकार लोगों की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है.

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से कहा था कि जब तक लोगों की चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक संयंत्र पर चल रहा काम रोक दिया जाए.

शुक्रवार को प्रधानमंत्री से मिलने वालों में तमिलनाडु के वित्तमंत्री ओ पनीरसेल्वम और संयंत्र का विरोध करने वाले गुट के नेता डॉक्टर उदयकुमार शामिल थे.

असंतुष्ट

संयंत्र पर समिति बनाने की बात पर डॉक्टर उदय कुमार असंतुष्ट थे.

बीबीसी से बातचीत में उदय कुमार ने कहा, “प्रधानमंत्री ने बैठक में परमाणु ऊर्जा से जुड़ी चिंताओं को कम करने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया था. हम इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन हमने जवाब नहीं दिया क्योंकि हम इसे वाद-विवाद का अखाड़ा नहीं बनाना चाहते. प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया से हम संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन ये दूसरा अच्छा कदम है. प्रधानमंत्री ने हमें बुलाकर हमसे बात की और हमारी समस्याओं को सुना.”

बीबीसी से बातचीत में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणस्वामी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने संयंत्र का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं से कहा कि देश को और तमिलनाडु को परमाणु ऊर्जा की ज़रूरत है.

ये पूछे जाने पर कि क्या बातचीत पूरी होने तक संयंत्र पर काम रोक दिया जाएगा, वी नारायण स्वामी ने कहा, “नहीं, नहीं. जहाँ तक प्रधानमंत्री की बात है, उन्होंने तमिलनाडु राज्य सरकार और संयत्र का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं की इस मांग पर कुछ नहीं कहा.”

कई सरकारी एजेंसिंया और केंद्र सरकार लोगों को संयंत्र की सुरक्षा का भरोसा दिला चुके हैं, लेकिन स्थानीय लोग अपनी मांग के समर्थन में भूख हड़ताल पर भी जा चुके हैं.

नौ अक्टूबर को एक बार फिर वो एक दिन की भूख-हड़ताल करेंगे.

संयंत्र

संयंत्र के दो रिऐक्टरों में से पहले रिएक्टर को जल्द ही शुरू हो जाना था. 13,000 करोड़ रुपए का ये संयंत्र रूस की मदद से बनाया जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि इससे तमिलनाडु की बिजली समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन जापान में भूकंप और सूनामी के बाद से परमाणु संयंत्र और ऊर्जा पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

पिछले महीने केंद्रीय मंत्री वी नारायणस्वामी इलाके का दौरा करने गए थे और वापस आकर उन्होंने प्रधानमंत्री को स्थिति की जानकारी दी थी.

देश के दूसरे हिस्सों में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. विरोधी परमाणु ऊर्जा से जुड़े खतरे गिनाते हैं, तो समर्थक देश की आर्थिक प्रगति के लिए ऊर्जा की ज़रूरत की बात करते हैं.

भारत ने अमरीका सहित दूसरे देशों से परमाणु समझौते किए हैं, लेकिन विरोध प्रदर्शनों के चलते विदेश में भारत की छवि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

प्रदर्शन पर आश्चर्य

उधर बीबीसी से बातचीत में परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व प्रमुख अनिल काकोडकर ने कुडनकुलम संयंत्र के विरोध में चल रहे प्रदर्शन पर आश्चर्य जताया और ज़ोर देकर कहा कि लोगों को साथ लेकर चलने की ज़रूरत है.

काकोडकर ने कहा कि वो संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आश्वस्त हैं.

उन्होंने कहा, “ये कहना तो गलत होगा कि किसी भी काम को कोई खतरा नहीं है. लेकिन हमें सोचना होगा कि क्या ये खतरा लेने योग्य है. और अगर आप मनोवैज्ञानिक बातों को दूर रखेंगे तो आप पाएंगे कि परमाणु ऊर्जा सबसे सुरक्षित है.”

सरकार उम्मीद कर रही है कि वर्ष 2035 तक परमाणु ऊर्जा से करीब 60,000 मेगावॉट तक की बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा.

अभी ये आंकड़ा 4,500 मेगावॉट के आसपास है.