दिल्ली बम धमाका: एक और गिरफ़्तार

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Image caption एनआईए ने भले ही तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन अभी तक इस मामले में उसे कोई ख़ास सफलता नहीं मिली है.

दिल्ली हाईकोर्ट ब्लास्ट मामले में गिरफ़्तार तीसरे अभियुक्त डॉ वसीम को दिल्ली की अदालत ने 14 दिनों के लिए जांच एजेंसी की हिरासत में भेज दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सात सितंबर को दिल्ली में हुए बम धमाके की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर के डॉ वसीम को गिरफ़्तार किया था और शुक्रवार को उन्हें दिल्ली के पटियाला हाउस अदालत में पेश किया था.

इस मामले में पकड़े गए दूसरे अभियुक्तों की पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर एनआईए ने गुरूवार को डॉ वसीम को गिरफ़्तार किया था.

जम्मू के किश्तवाड़ के रहने वाले वसीम बांग्लादेश में मेडिकल की पढ़ाई कर रहें हैं.

इस बीच इस मामले में पहले से गिरफ़्तार एक अन्य अभियुक्त आमिर अब्बास देव को अदालत ने 14 अक्तूबर तक एनआईए की रिमांड पर भेज दिया.

शुक्रवार को एनआईए ने आमिर अब्बास देव को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था.

स्कूली छात्र

इस मामले मे गिरफ़्तार एक अन्य अभियुक्त आबिद हुसैन को अदालत ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास भेजने का आदेश दिया. उन्हें भी शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था लेकिन उनकी मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें नाबालिग़ क़रार दिया गया था.

इससे पहले एनआईए ने आबिद को पांच अक्तूबर को अदालत में पेश किया था और कोर्ट से कहा था कि वो आबिद हुसैन से पूछताछ कर चुकी है और अब उसे आबिद से और पूछताछ की जरूरत नहीं है.

लेकिन अदालत ने आबिद हुसैन को दो दिनों के न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

आबिद हुसैन ने उस समय अदालत से कहा था कि उसका जन्म 1994 में हुआ था और वो नाबालिग़ नहीं है लेकिन उसके पास मौजूद किसी दस्तावेज़ में उनकी असल जन्म तिथि दर्ज नहीं है.

आबिद हुसैन को 13 सितंबर को मीडिया संगठनों को एक ई-मेल भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

बताया जाता है कि हुसैन किश्तवाड़ के इस्लामिया फरीदिया उच्चतर माध्यमिक स्कूल का छात्र है.

आमिर अब्बास देव और आबिद हुसैन ने प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन हरकत उल जिहाद अल इस्लामी(हूजी) के नाम से मीडिया संगठनों को कथित तौर पर ई-मेल भेजकर विस्फोट की ज़िम्मेदारी ली थी.

इस विस्फोट में 15 लोगों की मौत हुई थी और 70 अन्य घायल हो गए थे.

हुसैन और देव के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता, ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि रोकथाम क़ानून और विस्फोटक तत्व क़ानून की साज़िश, हत्या, हत्या के प्रयास, नुक़सान पहुंचाने और विस्फोटकों का इस्तेमाल करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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