तेलंगाना बनने तक जारी रहेगी हड़ताल

तेलंगाना के विधायक
Image caption तेलंगाना संघर्ष समिति ने कहा है कि राज्य की मांग पूरी ना होने तक हड़ताल जारी रहेगी.

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए चल रही अनिश्चित काल की हड़ताल का शनिवार को 26वां दिन है और आंदोलन चलाने वाली संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की घोषणा नहीं करती, हड़ताल वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता.

लेकिन शुक्रवार को आयोजित संघर्ष समिति की बैठक में तीन दिन के रेल रोको कार्यक्रम की तारीख़ बदल दी गई है.

समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने कहा की रेल रोको कार्यक्रम नौ , दस और ग्यारह अक्तूबर की बजाय अब 12 , 13 और 14 अक्तूबर को होगा.

नौ से 11 अक्तूबर तक हैदराबाद में हड़ताली सरकारी कर्मचारियों का महाधरना आयोजित होगा.

रेल रोको को लेकर तनाव

प्रस्तावित रेल रोको कार्यक्रम को लेकर तेलंगाना में तनाव काफी तेज़ी से बढ़ रहा है क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारों ने कहा है कि वो रेल सेवाएं नहीं रोकेंगे बल्कि पुलिस की सुरक्षा में ट्रेने चलाई जाएंगी.

इस पर तेलंगाना समर्थकों ने गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है. कांग्रेस के सांसद पी. प्रभाकर ने कहा कि इन परिणामों की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी.

तेलंगना राष्ट्र समिति के विधायक हरीश राव ने कहा कि अगर ज़बर्दस्ती ट्रेनें चलाई गईं तो लाखों लोग पटरियों पर लेट जाएँगे और किसान अपनी बैल गाड़ियाँ पटरियों पर खड़ा करके एक भी रेल चलने नहीं देंगे.

दूसरी और रेलवे मंत्रालय में उप-मंत्री मुनिअप्पा ने कहा कि लोगों का असुविधा से बचने के लिए सामान्य ढंग से ट्रेनें चलाना ज़रूरी है और इसके लिए सरकार ज़रूरी कदम उठाएगी.

अंधकार की ओर

एक तरफ़ तेलंगाना समर्थक अपना आंदोलन और तेज़ करने की बात कर रहे हैं दूसरी तरफ़ तेलंगाना में हालत लगातार ख़राब होते जा रहे हैं. आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही पूरा राज्य अंधकार में डूब सकता है.

नेशनल थेर्मल पॉवर कारपोरेशन यानि एनटीपीसी के अधिकारियों का कहना है कि कोयले की कमी से उनके रामागुंडम बिजली घर के बंद होने की नौबत आ गई है.

अगर 2000 मेगावाट का ये प्लांट बंद हो जाता है तो फिर इस का प्रभाव पूरे दक्षिणी भारत के साथ-साथ महाराष्ट्र पर भी पड़ेगा.

तेलंगाना में 500 मेगावाट का एक बिजली घर पहले ही बंद हो चुका है और इससे बिजली का संकट इतना बढ़ गया है कि ग्रामीण इलाकों में 12 घंटे की बिजली कटौती लागू कर दी गई है जबकि हैदराबाद में चार घंटे और दूसरे बड़े शहरों और क़स्बों में आठ घंटे बिजली काटी जा रही है.

रोडवेज़ का हालत ख़राब

इधर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन यानि आरटीसी की माली हालत भी ख़राब होती जा रही है क्योंकि अब तक की हड़ताल में उसे 140 करोड़ रूपए का नुकसान हो चूका है.

आरटीसी के अधिकारी प्रसाद राव ने कहा कि अगर कर्मचारी जल्द हड़ताल समाप्त नहीं करते तो कारपोरेशन का दिवालिया निकल जाएगा और उसके निजीकरण की नौबत आ जाएगी.

इधर इन अटकलों के बीच के केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार कर रही है, राज्यपाल इएसएल नरसिम्हन शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे. वो शनिवार को प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें रिपोर्ट देंगे.

इस बीच संभावना है कि कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को भी एक दो दिन में दिल्ली बुलाएगी.

इन की ये यात्रा इसलिए भी अहम है कि ऐसे संकेत मिल रहे हैं की अगले हफ़्ते दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होगी जिसमें तेलंगाना के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख को एक अंतिम रूप दिया जाएगा.

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