गवाह के फ़रार होने पर चार पुलिसकर्मी गिरफ़्तार

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Image caption सोहराबुद्दीन के फ़र्ज़ी मुठभेड़ का मामला नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का ही है

राजस्थान पुलिस ने सोहराबुद्दीन शेख़ मुठभेड़ मामले के एक अहम गवाह सिल्वेस्टर डैनिएल के हिरासत से भागने और फिर पकड़े जाने के सिलसिले में चार पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार किया है.

गिरफ़्तार हुए चारों पुलिसकर्मी वडोदरा पुलिस के हैं और ये सिल्वेस्टर डैनिएल के साथ थे जब वे फ़रार हुए.

हालांकि शनिवार रात को ही सिल्वेस्टर डैनिएल को दोबारा हिरासत में ले लिया गया था.

वडोदरा के पुलिस आयुक्त सतीश शर्मा ने बताया, "राजस्थान में सिल्वेस्टर की कोर्ट में पेशी के लिए ये चारों पुलिसकर्मी उनके साथ गए थे. इन सभी को देर रात गिरफ़्तार कर लिया गया है."

उन्होंने बताया कि इनके नाम हैं- उपनिरीक्षक एमएस गोहिल, हेड कांस्टेबल एल अंबालाल, कांस्टेबल रणछोड़ जीनाभाई और विजय बाबूराव.

पुलिस आयुक्त ने कहा कि सिल्वेस्टर के भागने के बाद उदयपुर के हिरण मागरी थाने में दर्ज की गई शिकायत में पुलिसकर्मियों के बयान में अनियमितता पाई गई है और इसकी वजह से उन्हें गिरफ़्तार किया गया है.

गवाह फ़रार

सोहराबुद्दीन शेख़ कथित फ़र्जी मुठभेड़ मामले का एक अहम गवाह सिल्वेस्टर गुजरात पुलिस की हिरासत से शनिवार को फ़रार हो गया था.

गुजरात पुलिस उसे अदालत में पेश करने के लिए उदयपुर लेकर गई थी.

हालांकि इस मामले पर गुजरात और राजस्थान पुलिस के बयानों में फ़र्क़ बताया गया था.

जहां राजस्थान पुलिस ने कहा था कि सिलवेस्टर ने शौचालय जाने का बहाना किया और वहां से ग़ायब हो गया, वहीं गुजरात पुलिस का कहना था कि वो शुक्रवार को तब भाग निकला जब वो चाय पीने के लिए राजपथ के किनारे रुके थे.

सिल्वेस्टर उर्फ़ दीपू सोहराबुद्दीन शेख मामले में एक अहम गवाह है और उसे एक दूसरे गैंगस्टर हमीद लाला की हत्या के मामले में उदयपुर ले जाया गया था.

सोहराबुद्दीन शेख़ की हत्या एक कथित फ़र्ज़ी पुलिस मुठभेड़ में नवंबर 2005 में हुई थी. इस मामले में भारतीय पुलिस सेवा के तीन अधिकारियों समेत 14 पुलिसकर्मी जेल में बंद हैं.

सीबीआई का मानना है कि सिल्वेस्टर के पास सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी की हत्या के मामले में अहम सूचनाएं हैं.

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