'पीएम कौन हो, ये पार्टी तय करेगी'

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Image caption आडवाणी ने कहा कि अपनी यात्रा में वो लोगों के समक्ष काले धन का मुद्दा उठाएँगे.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा, ये पार्टी तय करेगी.

मंगलवाल 11 अक्तूबर को जयप्रकाश नारायण के जन्मदिन से आडवाणी की जनचेतना यात्रा बिहार के सारण ज़िले के सिताबदियरा से शुरू हो रही है. 38 दिनों की ये यात्रा 20 नवंबर को दिल्ली में समाप्त होगी.

यात्रा शुरू होने के पहले सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे आडवाणी ने कहा, “प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका निर्णय पार्टी करेगी. अभी तो दो-तीन साल पड़े हैं. हमारे पास नेताओं की कमी नहीं है.”

आडवाणी ने कहा कि अपनी यात्रा में वो लोगों के समक्ष काले धन का मुद्दा उठाएँगे कि कैसे इस धन को भारत वापस लाया जाए और इसे देश के विकास में किस तरह लगाया जाए.

उन्होंने कहा, “हमें पता चला है कि सरकार के पास कई नाम आए हैं. राजनीतिक दलों को सरकार पर दबाव बढ़ाना चाहिए कि सरकार ये नाम सार्वजनिक करे. इस बारे में एक श्वेत पत्र जारी किया जाए कि सरकार ने अभी तक क्या-क्या किया है.”

काला धन

पूर्व उप-प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों में जो नेतृत्व देश को मिला है, उससे जनता के मन में आक्रोश बढ़ता गया है, चाहे वो महंगाई के कारण हो, भ्रष्टाचार के कारण, या फिर विदेशों में रखे धन के कारण. उन्होंने कहा कि नेतृत्व की कमी के काऱण राजनीतिक व्यवस्था के बारे में लोगों के विश्वास में कमी आई है.

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की जितनी क्षति यूपीए के काल में हुई है, पहले नहीं हुई.”

आडवाणी ने सरकार को भ्रष्टाचार मामलों से जोड़ते हुए कहा कि सांसदों को वोट के बदले कथित तौर पर धन का प्रस्ताव दिया जाना ‘टर्निंग प्वाइंट’ था.

आडवाणी ने कहा, “हमको भी जानकारी थी कि इनको (भाजपा सांसदों को) इस तरह की घूस दी जा रही है और वो लोगों को जाकर दिखाएंगे कि उन्हें घूस दी जा रही है और उन्होंने किया. इसके बाद ये सरकार किसी भी प्रकार की नैतिकता का दावा नहीं कर सकती. 19 लोगों को क्रॉस-वोटिंग करवाया और वो घूस देकर करवाया. हिंदुस्तान की लोकतंत्र की साख में ये टर्निंग प्वाइंट रहा है.”

आडवाणी ने कहा कि लोगों के ग़ुस्से कारण यूपीए सरकार का नैतिक पतन है.

सिविल सोसाइटी पर पूछे एक सवाल पर आडवाणी ने कहा कि वो नहीं मानते कि अन्ना की टीम संसदीय प्रक्रिया को चुनौती दे रही है और इसके कारण देश में सही वातावरण पैदा हुआ है.

उन्होंने कहा, “सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने जनता में चेतना पैदा की है. मेरा कार्य होगा इस चेतना को और बढ़ाना. मेरा मानना है कि लोकतंत्र को मज़बूत करने की राजनीतिक दलों को जवाबदारी है.”

चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने को क़ानूनी जामा पहनाने पर आडवाणी का कहना था कि देश में चुनावी सुधार ज़रूरी हैं, लेकिन दुनिया में भारत जैसे किसी भी बड़े देश में ऐसी प्रक्रिया मौजूद नहीं है.

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