मुद्दा सत्ता परिवर्तन नहीं व्यवस्था परिवर्तन है: आडवाणी

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Image caption मोदी की सदभावना यात्रा के दौरान आडवाणी भी गुजरात गए थे.

भारतीय जनता पार्टी में अंदरुनी खींचतान के बीच वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बहुचर्चित यात्रा बिहार के सिताबदियारा से शुरु हो गई है.

यात्रा से पहले लोगों को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि मुद्दा सिर्फ़ सत्ता परिवर्तन का नहीं है बल्कि देश की व्यवस्था में परिवर्तन का है.

उनका कहना था, '' देश में सत्ता नहीं व्यवस्था बदलना हमारा लक्ष्य है. लोगों में भ्रष्टाचार के कारण अनास्था आ गई है. देश ऐसे नहीं चल सकता जहां लोगों को खुद पर विश्वास न हो. ये व्यस्था बदलनी चाहिए.''

अपने पूरे भाषण में आडवाणी ने मूलत अपने पूर्व के कार्यों खासकर पूर्व की यात्राओं के बारे में बताया और कहा कि बिहार में अब काफी प्रगति हुई है.

आडवाणी 38 दिन में 23 राज्यों से होते हुए करीब 7600 किलोमीटर की यात्रा पूरी करेंगे.

सिताबदियारा से उनकी यात्रा को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरी झंडी दिखाई.

इस अवसर पर नीतीश कुमार का कहना था, '' कोई काले धन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहा है. उसका साथ देना ज़रुरी है. हम इस यात्रा में आडवाणीजी के साथ हैं और ये यात्रा सफल होगी जिससे लोग जुड़ेंगे.''

मोदी का ब्लॉग

आडवाणी की यात्रा से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग पर यात्रा का समर्थन किया है.

मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि इस यात्रा का जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि सिताबदियारा से शुरु होना एकदम सही है. वो लिखते हैं कि ‘इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता कि बिहार में जहां एक बार आडवाणीजी की यात्रा को रोका गया था वहीं से वो फिर यात्रा शुरु कर रहे हैं.’

पूर्व में कहा जा रहा था कि नरेंद्र मोदी आडवाणी की यात्रा से खुश नहीं हैं लेकिन मोदी ने अपने ब्लॉग के ज़रिए साफ करने की कोशिश की है इस तरह की बातें अफ़वाह के सिवा और कुछ नहीं.

ब्लॉग में लिखा गया है, ‘‘ मैंने आडवाणी जी के साथ काम किया है. यह शर्मनाक और दुखद है कि कुछ लोग स्वार्थी हितों के तहत काम कर रहे हैं और इस तरह की ख़बरें फैला रहे हैं.’’

कुछ समय पहले नरेंद्र मोदी ने भी गुजरात में तीन दिन का उपवास रखा था.

उल्लेखनीय है कि 1990 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर आडवाणी ने रथ यात्रा शुरु की थी जिसे समस्तीपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने रोक दिया था और आडवाणी को गिरफ्तार किया गया था.

इसी मुद्दे पर केंद्र में वीपी सिंह के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी.

अब आडवाणी फिर से 1991 का करिश्मा पैदा करने की कोशिश में हैं और शायद इसलिए यात्रा बिहार से शुरु की गई है.मुद्दा इस बार भ्रष्टाचार का है तभी यात्रा जयप्रकाश नारायण के जन्मदिन के दिन और उन्हीं के पैतृक गांव से शुरु की गई.

जयप्रकाश नारायण ने ही 1974 में संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था और लोगों को एकजुट किया था.

आडवाणी का कहना है कि वो अपनी यात्रा के ज़रिए लोगों को कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की जानकारी देंगे और उन्हें भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एकजुट करेंगे.

हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि आडवाणी अपनी इस यात्रा के ज़रिए एक बार फिर प्रधानमंत्री पद के लिए अपना दावा मज़बूत करने की कोशिश में हैं जिसके लिए संघ और पार्टी तैयार नहीं दिखती है.

आडवाणी ने रिश्वत के बदले वोट मामले में संसद में बयान देते हुए इस यात्रा की घोषणा की थी और समझा जाता है कि पार्टी में भी कम ही लोगों को इस यात्रा की योजना के बारे में पहले से जानकारी थी.

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