भारत-वियतनाम के बीच कई अहम समझौते

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Image caption इस मुलाक़ात के बाद बुधवार को मनमोहन सिंह दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं.

भारत और वियतनाम के बीच ऊर्जा, वाणिज्य, दूरसंचार और विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्त्वपूर्ण समझौते हुए हैं.

भारत की यात्रा पर आए वियतनाम के राष्ट्रपति ट्रोंओंग तान सांग और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हॉउस में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

इन दोनों देशों ने एक अहम बताई जा रही प्रत्यर्पण संधि पर भी हस्ताक्षर किए हैं.

बुधवार को एक लंबी बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने पत्रकारों को संबोधित किया और भारत और वियतनाम के बीच सामरिक और सुरक्षा संबंधों को और बेहतर बनाने की बात दोहराई.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार पिछले साल तक ढाई अरब डॉलर से भी ज़्यादा हो चुका था. हमने आपस में एक लक्ष्य तय किया है कि इसे 2015 तक सात अरब डॉलर तक पहुंचाएंगे."

मनमोहन सिंह ने इस बात का ही उल्लेख किया कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रोंओंग तान सांग को इस बात का भरोसा दिलाया है कि भारत उनके देश में और ज़्यादा निवेश करने के प्रयास करेगा.

ऊर्जा क्षेत्र पर प्राथमिकता

कई अहम समझौतों के अलावा भारत और वियतनाम ने तेल खोजने के मामलों में भी एक महत्त्वपूर्ण समझौता किया है.

दक्षिण चीन सागर में तेल की खोज पर कथित तौर से चीन को आपत्ति रही है.

लेकिन भारत की ओएनजीसी कंपनी ने भी बुधवार को कहा कि उनकी विदेशी इकाई ने वियतनाम की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोवियतनाम के साथ तीन साल की एक संधि पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस नई संधि के तहत भारत और वियतनाम तीन सालों तक तेल की खोज में एक दूसरे का सहयोग करेंगे जिसमे ड्रिलिंग और तेल निकालने का काम शामिल रहेगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देश के समक्ष सुरक्षा संबंधी कई चुनौतियाँ हैं जिसमे चरमपंथ और प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं.

वियतनाम के राष्ट्रपति की चार दिनों की भारत यात्रा अहम इसलिए भी बताई जा रही है क्योंकि दक्षिणी चीन महासागर में दोनों देशों द्वारा तेल की खोज पर हाल ही में कथित तौर पर चीन ने आपत्ति जताई थी.

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