'प्रधानमंत्री के पत्र पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई'

सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने 2जी मामले में पूछा है कि प्रधानमंत्री द्वारा भेजे गए पत्र पर कार्यवाही क्यों नही की गई.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2जी मामले पर सुनवाई करते हुए पूछा है कि स्पैक्ट्रम आबंटन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से लिखे गए पत्र पर कार्रवाई क्यों नही की गई.

कोर्ट का मानना है कि समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो स्थिति इस हद तक गंभीर नही होती.

तीन नवंबर वर्ष 2007 को लिखे गए पत्र में तत्कालीन संचार मंत्री ए राजा की ओर से स्पैक्ट्रम आबंटन के तरीक़े पर गंभीर सवाल उठाए थे. पत्र में नीलामी करके स्पैक्ट्रम आबंटन करने की वकालत की गई थी.

लेकिन अगले दिन ही भेजे गए अपने जवाब में राजा ने ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति को बदलने से इनकार कर दिया और विश्वास जताया कि आबंटन मे पारदर्शिता बरती जाएगी.

पक्ष

भारतीय जनता पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का अवलोकन गंभीर है और इस मामले पर सरकार को अपनी स्थिति साफ़ करनी चाहिए.

सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट मे पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल हरेन रावल ने कोर्ट के सामने प्रधानमंत्री के लिखे गए पत्र पर अपना पक्ष पेश करते हुए कहा कि आबंटन प्रक्रिया पर लिए गए निर्णय के कारण राजा के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले बरक़रार हैं.

स्वान टेल्कॉम के विनोद गोयनका और यूनिटेक के संजय चंद्रा की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से यह भी पूछा है कि वो 14 अभियुक्तों की ज़मानत याचिका का विरोध क्यों कर रही है, जिसमें राज्यसभा सांसद कनिमोड़ी का भी नाम शामिल है.

इस मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी.

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