कुडनकुलम: पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने कहा दौरा, चर्चा करेंगे

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Image caption कलाम ने कहा परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा है लेकिन वे ख़ुद दौरा करेंगे और वैज्ञानिकों से चर्चा कर 10 दिन बाद रिपोर्ट तैयार करेंगे

तमिननाडु में कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ हो गया है और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने कहा है कि वे इस तटवर्ती इलाक़े का दौरा करके और वैज्ञानिकों से चर्चा कर 10 दिन के बाद रिपोर्ट बनाएँगे.

कुडनकुलम के आसपास के ग्रामीण लोगों ने परमाणु संयंत्र के बाहर प्रदर्शन तेज़ कर दिया है. जापान के फ़ुकुशिमा हादसे से पैदा हुई भय के कारण प्रदर्शनकारी कहते हैं कि इस परमाणु संयंत्र को बंद करना चाहिए.

भारत की परमाणु ऊर्जा कारपोरेशन कुडनकुलम में 1000 मैगावॉट के दो परमाणु ऊर्जा रिएक्टर रूसी तकनीक से बना रही है और इनमें से पहला संयंत्र दिसंबर में चालू हो जाना था.

ये पूरी परियोजना लगभग 13000 करोड़ रूपए की लागत से बनाई जा रही है.

दौरा करुँगा, वैज्ञानिकों से चर्चा होगी: कलाम

शनिवार को इस मुद्दे पर पूछे जाने पर पूर्व राष्ट्रपति और देश के सम्मानित वैज्ञानिक अब्दुल कलाम ने कहा कि परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा है.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा, "मैं तटवर्ती इलाक़ों में इन संयंत्रों का दौरा करुँगा और ख़ुद वैज्ञानिकों से इसके सभी पहलुओं के बारे में चर्चा करुँगा. पूरी जानकारी एकत्र करने में दस दिन का समय लगेगा जिसके बाद एक रिपोर्ट बनाई जाएगी."

इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्थानीय लोगों को सुरक्षा के बारे में संतुष्ट करने की कोशिश की थी और उन्होंने केंद्रीय मंत्री नारायण स्वामी को तमिनाडु भेजने के साथ-साथ मुख्यमंत्री जयललिता को दो बार पत्र भी लिखे थे.

लेकिन मुख्यमंत्री जयललिता ने केंद्र से कहा है कि वह परमाणु संयंत्र का निर्माण कार्य तब तक बंद कर दे जब तक ग्रांववासी अपनी सुरक्षा के बारे में संतुष्ट नहीं हो जाते हैं.

लेकिन उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ये भी कहा था, "हम कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के मुद्दे पर स्थानीय लोगों की चिंताओं का सम्मान करेंगे. इस मुद्दे पर मैं आपके साथ खड़ी हूँ."

कुडनकुलम परियोजना परिसर में रहने वाले वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और मज़दूरों के परिवार विरोध प्रदर्शनों के चलते सुरक्षा और ज़रूरी वस्तुओं की उपलब्धता के बारे में चिंतित हैं.

उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार से वहाँ पहुँचकर काम कर रहे अनेक मज़दूर काम छोड़कर वापस जाने लगे हैं.

समाचार एजेंसियों के अनुसार वहाँ स्थानीय लोगों की ओर से उनके सामाजिक बहिष्कार जैसी स्थिति पैदा हो गई है.