बैंगलौर में मेट्रो रेल की शुरुआत

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Image caption मेट्रो की मदद से बैंगलौर के ट्रैफ़िक जाम से बचने में मदद मिलेगी.

गुरुवार को बैंगलौर मेट्रो रेल से जुड़ने वाला तीसरा भारतीय शहर बन गया है.

बैंगलौर मेट्रो को नम्मा मेट्रो यानि कन्नड में अपना मेट्रो का नाम दिया गया है.

पहले चरण में मेट्रो बैंगलौर के एमजी रोड से बाइपनहल्ली स्टेशन तक की 6.7 किमी की दूरी 14 मिनट में पूरा करेगी. मेट्रो रेल से बैंगलौर शहर की बढ़ती ट्रैफ़िक समस्या से निपटने में मदद मिलेगी.

आधुनिक रेल

बैंगलोर मेट्रो के मैनेजिंग डॉयरेक्टर एन सिवसैलम ने बीबीसी से बातचीत में मेट्रो की शुरुआत पर खुशी जताई और कहा कि मेट्रो ट्रेन के बारे में सोचने और उसके कार्यान्वयन में 25 साल लग गए.

दक्षिण भारत की पहली मेट्रो सेवा में आधुनिक तकनीक से लैस है. बैंगलोर मेट्रो के वित्त प्रबंधक वसंत राव ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अब लोगों को पता चलेगा कि मेट्रो क्या चीज़ होती है, और मेट्रो में सफ़र करना कैसा होता है.

करीब सात किलोमीटर की दूरी में अभी छह स्टेशन पड़ेंगे औऱ ये सभी स्टेशन ज़मीन के ऊपर होंगे.

वसंत राव के मुताबिक 2013 दिसंबर में मेट्रो का पहला फ़ेस पूरा हो जाएगा. इस फ़ेस में 42 किलोमीटर की मेट्रो का काम पूरा होगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष 2017 तक 100 किलोमीटर दूरी के मेट्रो का काम पूरा हो जाएगा.

मेट्रो के काम में अभी तक करीब 4,600 करोड़ खर्च हो चुका है, और पहले फ़ेस में कुल 11,900 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. खर्च का ज़्यादातर हिस्सा ज़मीन के नीचे स्टेशनों को बनाने में खर्च होगा.

ज़मीन के मेट्रो कार्य में जहाँ 175 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर खर्च हुआ है, ज़मीन के अंदर मेट्रो कार्य में 420 करो़ड़ प्रति किलोमीटर का खर्च आएगा.

बैंगलोर मेट्रो अधिकारियों ने दिल्ली मेट्रो के साथियों के अलावा अंतरराष्ट्रीय़ कंपनियों से काम में मदद ली.

बैंगलोर मेट्रो में राज्य और केंद्र सरकार दोनो का बराबरी का हिस्सा है.

बैंगलोर में मेट्रो की कल्पना सालों से की जा रही थी, लेकिन ये सपना अब जाकर सच हुआ है. इस काम में कई तरह की मुश्किलें पेश आईं, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती थी मेट्रो के लिए ज़मीन का अधिग्रहण करना.

वसंत राव ने कहा कि मेट्रो कार्य की अच्छी बात ये रही कि आर्थिक संकट के बावजूद लोगों की ज़मीन बाज़ार के भाव पर ली गई.

"बैंगलोर मेट्रो के बारे में सबसे अच्छी बात ये है कि किसी ने भी ज़मीन अधिग्रहण के दाम को चुनौती नहीं दी है. हाँ, ज़मीन अधिग्रहण पर कुछ कानून कार्रवाई झगड़े हुए हों, लेकिन ये तो लोगों का हक़ है."

अभी तक बनी मेट्रो बैंगलोर के इलक्ट्रॉनिक सिटी और सूचना प्रौद्योगिकी वाले इलाकों से गुज़रेगी.

हाईटेक है बैंगलौर मेट्रो

बैंगलौर मेट्रो की योजना साल 2003 में बनाई गई और 2006 में इस पर काम शुरु हुआ.

बैंगलौर की नई नवेली मेट्रो उच्च तकनीक से सुसज्जित है.

पूरी ट्रेन वाई-फ़ाई है, यानि ट्रेन में बैठे यात्री इंटरनेट पर काम कर सकते हैं और लैपटॉप, टैबलेट और मोबाईल इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं.

आपात स्थिति में यात्री डिब्बे में मौजूद कॉल बटन को दबाकर रेल के स्टाफ़ से बात कर सकते हैं.

रेल के डिब्वे और स्टेशन कैमरे से लैस होंगे.

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