आलोचकों को निराशा ही हाथ लगेगी: किरण बेदी

Image caption किरण बेदी पर आरोप है कि वह संस्‍थाओं से ज्‍यादा बिल वसूल रही हैं, जो उन्‍हें सेमिनार या बैठकों में बुलाते हैं.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाने वाली अन्ना टीम की प्रमुख सदस्या किरण बेदी पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे हैं.

किरण बेदी पर आरोप है कि वह उन एनजीओ और संस्‍थाओं से ज्‍यादा बिल वसूल रही हैं, जो उन्‍हें सेमिनार या बैठकों में बुलाते रहे हैं.

अख़बार के इन आरोपों के बाद बेदी ने ट्वीट किया है, 'यह बेहद दिलचस्‍प है कि इकॉनॉमी क्‍लास में यात्रा कर एक मक़सद के लिए पैसा बचाना अख़बार की सुर्खी बना है!'

अंग्रेजी अख़बार 'इंडियन एक्‍सप्रेस' ने बिल रिकॉर्ड, चेक की कॉपी के आधार पर यह दावा किया है.

अख़बार ने पहले पन्ने पर ख़बर लगाई है, 'किरण लोकपाल बेदी बायज डिस्‍काउंटेड एयर टिकट्स, गेट्स हॉस्‍ट्स टू पे फुल फेयर.'

यानि कि किरण बेदी ने खरीदे तो रियायती हवाई टिकट लेकिन वसूला पूरा किराया.

अख़बार का कहना है कि 2001 के सरकारी दिशानिर्देशों के मुताबिक सभी वीरता पुरस्‍कार से सम्मानित लोग एयर इंडिया के इकॉनॉमी क्‍लास के किराए में 75 फ़ीसदी की छूट के हक़दार हैं.

बेदी को 1979 में राष्ट्रपति का वीरता पुरस्कार मिला था.

बेदी को वीरता पुरस्‍कार से सम्‍मानित होने के नाते एयर इंडिया के टिकटों पर रियायतों का अधिकार हासिल है.

अख़बार के अनुसार बेदी ने इन सरकारी दिशानिर्देशों का फ़ायदा उठा कर सस्‍ते टिकट खरीदे, लेकिन आयोजकों से पूरा किराया वसूल किया.

किरण बेदी का स्पष्टीकरण

किरण बेदी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उन्हें किसी भी प्रकार का निजी फ़ायदा नहीं हुआ.

उन्होंने कहा, “बिज़नेस क्लास यात्रा संस्थाओं के निमंत्रण का ही हिस्सा होती है. इकॉनमी क्लास में यात्रा करना एक व्यक्तिगत इच्छा है ताकि इससे बचने वाला पैसा मेरी ग़ैर-सरकारी संस्थान में जा सके. इसमें मुझे किसी भी प्रकार का निजी फ़ायदा नहीं हुआ है. हमारे आलोचकों के लिए मुझे बुरा लग रहा है क्योंकि उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी.”

लेकिन अख़बार का कहना है कि 2006 में जब बेदी भारतीय पुलिस सेवा में थीं तब से लेकर पिछले पांच सालों में उन्होंने 12 मौकों पर ऐसा किया. हाल में 29 सितंबर, 2011 को उन्होंने ऐसा किया.

इसके बाद उन्हें जो पैसा मिला वो उनकी संस्था इंडिया विज़न फाउंडेशन के खाते में जमा हुआ. किरण बेदी इस संस्था की प्रमुख हैं .

बेदी का कहना है कि उन्‍होंने पैसा बचा कर संस्‍था के जरिए ज़रूरतमंदों के काम में लगाया है और ऑडिट में कहीं कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है. उन्‍होंने आगे भी किसी जांच के लिए तैयार होने की बात कही है.

संबंधित समाचार