राष्ट्रपति जाते नहीं, कोई और जा नहीं सकता

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Image caption शिमला और हैदराबाद में राष्ट्रपति के दो रिट्रीट हैं

यूं तो भारत के राष्ट्रपति का निवास स्थान राष्ट्रपति भवन है जो अपनेआप में एक आलिशान महल की तरह है, मगर राष्ट्रपति के लिए आरामगाह के रुप में शिमला और हैदराबाद में भी दो विशेष ठिकाने बनाए गए हैं.

शानोशौकत से भरपूर ये दोनों ‘रिट्रीट’ सालभर राष्ट्रपति की यात्रा और उनके निवास के लिए तैयार रहते हैं.

हालांकि सूचना के अधिकार के तहत इस वर्ष जुलाई तक मिली जानकारी के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में शिमला स्थित रिट्रीट में राष्ट्रपति का जाना केवल एक बार हुआ और हैदराबाद के दूसरे रिट्रीट पर वो इस दौरान चार बार गए.

राष्ट्रपति भले ही न पहुंचे लेकिन शिमला और हैदराबाद स्थित इन दोनों रिट्रीट की देखभाल के लिए नियुक्त कर्मचारियों के वेतन पर हर साल लाखों का ख़र्च होता है.

दुर्भाग्य की बात ये है कि आप और हम इन दोनों आरामगाहों के अंदर जाना तो दूर, इनके आसपास भी नहीं फटक सकते.

आरटीआई के ज़रिए जिन पाँच सालों की जानकारी मिली है उनमें पिछले चार साल के दौरान प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति रही हैं जबकि इससे पहले अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति थे.

राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार राष्ट्रपति अपने दोनों रिट्रीट पर साल में कम से कम एक बार जाते हैं. इस प्रवास के दौरान उनका कार्यालय भी साथ रहता है यानि सारा कामकाज दिल्ली से शिमला या हैदराबाद पहुंच जाता है. लेकिन हक़ीक़त में ऐसा होता नहीं है.

5 साल में एक बार

जुलाई 2007 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद प्रतिभा पाटिल 2008 में 27 मई से लेकर 1 जून तक शिमला गईं. लेकिन जानकारी के मुताबिक उनसे पहले राष्ट्रपति रहे अब्दुल कलाम अपने कार्यकाल के आख़िरी साल में शिमला स्थित अपने रिट्रीट में नहीं गए. कलाम हैदराबाद स्थित रिट्रीट में जून 2006 में तीन दिन के लिए गए थे. इससे पहले की जानकारी उपलब्ध नहीं है.

मौजूदा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल इस वर्ष जुलाई से पहले दिसंबर 2007 में पाँच दिन के लिए, दिसंबर 2008 से जनवरी 2009 में 16 दिन के लिए और फिर दिसंबर 2010 में आठ दिन के लिए हैदराबाद गई थीं.

राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट कहती है कि शिमला स्थित 'रिट्रीट बिल्डिंग' और हैदराबाद में मौजूद राष्ट्रपति निलायम, ''भारत के राष्ट्रपति कार्यालय की एकीकृत भूमिका के प्रतीक हैं. इन स्थानों का देश के उत्तर और दक्षिणी हिस्से में होना हमारे देश और हमारी विविध संस्कृतियों और लोगों की एकता का प्रतीक है.''

लाखों का ख़र्च

इन दोनों स्थानों की देखभाल के लिए तैनात कर्मचारियों के वेतन पर हर साल लाखों रूपए ख़र्च होते है. केवल शिमला के रिट्रीट में ही 13 माली और एक चौधरी के वेतन पर हर वर्ष 30 लाख से ज़्यादा ख़र्च होता है.

हैदराबाद में स्थित राष्ट्रपति निलायम इमारत में देखरेख करने के लिए 35 अस्थाई और तीन नियमित कर्मचारी हैं. नियमित कर्मचारियों की तनख़्वाह पर सालाना साढ़े सात लाख से अधिक ख़र्च हो रहा है जबकि अस्थाई कर्मचारियों को 224 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से वेतन दिया जाता है. इनके इलावा दोनों स्थानों पर सुरक्षा गार्ड भी तैनात हैं.

आम लोगों के लिए नहीं

शिमला में ख़ासतौर पर स्थानीय लोगों और पर्यटकों में इस बार को लेकर नाराज़गी रहती है कि उन्हें रिट्रीट के आसपास जाने की इजाज़त नहीं है.

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Image caption पांच सालों में राष्ट्रपति केवल छह दिन के लिए शिमला के रिट्रीट पर गए हैं

शिमला में एक होटल के मालिक ज्ञान चंद कहते हैं कि रिट्रीट का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने कहा, ''हम भी राष्ट्रपति की सुरक्षा की अहमियत समझते हैं लेकिन जब उन्हें यहां नहीं आना होता है तब अगर इसे आम लोगों के लिए खोला जाए तो उन्हें ज़रूर पसंद आएगा.''

राष्ट्रपति सचिवालय के एक अधिकारी जेएस लालरिंगम के अनुसार आज तक शिमला के रिट्रीट को कभी आम लोगों के लिए खोला नहीं गया है हालांकि हैदराबाद स्थित राष्ट्रपति निलायम को पिछले साल दस दिनों के लिए पहली बार आम लोगों के लिए खोला गया था.

प्रियंका का कॉटेज

शिमला के शोरग़ुल से 15 किलोमीटर दूर यह रिट्रीट मशोबरा पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. प्राकृतिक सुंदरता के कारण मशोबरा एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है. इसके बिल्कुल क़रीब प्रियंका गांधी वाडरा अपना कॉटेज बना रही हैं. जिसकी वजह से पर्यटकों की दिलचस्पी इस इलाक़े में और भी बढ़ गई है.

रिज से एक हज़ार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस इमारत को 1895 में तत्कालीन वायसराय ने अपने लिए लिया था. ख़ास बात यह है कि यह पूरी इमारत लकड़ी की बनी हुई है और दीवारें ‘दज्जी दीवार निर्माण’ शैली की हैं. ‘दज्जी दीवार’ निर्माण की पारंपरिक कश्मीरी शैली है, जो अपनी स्थिरता और भूकंप-प्रतिरोध के लिए जानी जाती हैं.

वर्ष 1850 में निर्मित यह इमारत 10 हज़ार वर्ग फुट में फैली है.

इसी तरह से हैदराबाद की इमारत को भारत की स्वतंत्रता के बाद तत्कालीन शासक निज़ाम से लिया गया था. इस इमारत का निर्माण वर्ष 1860 में किया गया था और इसका क्षेत्र 90 एकड़ है.

यह तो समझ में आता है कि राष्ट्रपति अपने व्यस्त कार्यक्रम के कारण इन स्थानों पर न जा सकें. पर शायद टैक्स भर रहे आम लोगों को इन स्थानों पर कभी-कभी जाने की इजाज़त दी जा सकती है.

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