भ्रष्टाचार के विरूद्ध निर्णायक क़दम के लिए सही समय: मनमोहन

मनमोहन सिंह
Image caption तेज़ी से बढ़ती मंहगाई मनमोहन सिंह की सरकार के लिए राजनीतिक मुसीबत बना हुआ है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी चिंता की ख़ास वजह रही है और मंहगाई को कम करने के लिए रिज़र्व बैंक ज़रूरी आर्थिक और मौद्रिक क़दम उठाता रहेगा.

दिल्ली में राज्यपालों के सम्मेलन में बोलते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के सामने सबसे तात्कालिक चुनौती मंहगाई को क़ाबू में रखते हुए तेज़ आर्थिक विकास को जारी रखने की है.

लेकिन प्रधानमंत्री ने इसी सम्मेलन में ये भी कहा कि "तेज़ विकास और तरक़्क़ी की हमारी कोशिशें तभी रंग लाएंगी जब हम सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सकेंगे और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बना सकेंगे."

दो दिनों के इस कार्यक्रम में बोलते हुए मनमोहन सिंह ने रविवार को कहा, "मुझे लगता है कि इस दिशा में निर्णायक क़दम उठाने का ये सही समय है."

मुद्रा स्फीति

पंद्रह अक्तुबर को ख़त्म हुए हफ़्ते में खाद्य पदार्थों की थोक क़ीमतों में पिछले साल के मुक़ाबले 11.43 फ़ीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. मुद्रा स्फीति में ये बढ़ोतरी सब्ज़ियों की क़ीमतों में तेज़ी की वजह से हुई है.

पिछले छह महीनों में खाने-पीने की चीज़ों में दर्ज की गई सबसे अधिक बढ़ोतरी है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि खाद्य पदार्थों की क़ीमतों को कम करने के लिए कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्र में पैदावार और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की ज़रूरत है.

दोहरी मार

उन्होंने कहा कि इस दरमियान मंहगाई के दबाव को कम करने के लिए रिज़र्व बैंक आवश्यक मौद्रिक और वित्तीय निर्णय लेता रहेगा.

पिछले लगभग बीस माह में रिज़र्व बैंक 13 बार ब्याज दर बढ़ा चुका है लेकिन इसका कोई असर मंहगाई पर देखने में नहीं आया है.

बल्कि ब्याज दर के बढ़ने से बैंकों से घर या कार जैसी चीज़ों की ख़रीदारी के लिए कर्ज़ लिए हुए लोगों की देनदारी बढ़ गई है, जिसका असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है.

व्यवसाय जगत कह रहा है कि बढ़े हुए बैंकों के ब्याज दर ने निर्माण क्षेत्र में उत्पादन की क़ीमतों को तेज़ कर दिया है जिसका असर औद्योगिक विकास पर पड़ रहा है.

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार के संदर्भ में बोलते हुए प्रधानमंत्री का कहना था कि नागरिकों को अच्छा प्रशासन देने के लिए उनकी सरकार प्रशासन के कामों में "पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने" के सभी क़दम उठाएगी.

इस सिलसिलेम में अपनी सरकार के ज़रिए उठाए गए क़दमों में उन्होंने लोकपाल बिल का भी ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा कि लोकपाल बिल के अलावा ज़मीन अधिग्रहण क़ानून में संशोधन से संबंधित एक बिल संसद में पेश किया गया है.

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