मणिपुर में आर्थिक नाकेबंदी ख़त्म

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Image caption मणिपुर में दो राष्ट्रीय राजमार्गों की आर्थिक नाकेबंदी की गई थी

मणिपुर सदर हिल्स सब डिविज़न को अलग ज़िला बनाने की मांग मानने के राज्य सरकार के फ़ैसले के बाद राज्य के दो राजमार्गों पर 92 दिनों से चल रही आर्थिक नाकेबंदी ख़त्म कर दी गई है.

राज्य सरकार ने कूकी गुटों के साथ इस संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है और कहा है कि सदर हिल्स सब डिविज़न को जल्द से जल्द एक पूर्ण ज़िला बनाया जाएगा.

कूकी बहुल वाला सदर हिल्स सब डिविज़न उत्तरी मणिपुर के नगा बहुल सेनापति ज़िले में हैं. लेकिन नगा गुट राज्य सरकार के इस फ़ैसले से नाराज़ हैं और अब उन्होंने बदले में आर्थिक नाकेबंदी करने की चेतावनी दी है.

एक दिन पहले गृह मंत्री पी चिदंबरम ने प्रदर्शन कर रहे कूकी और अन्य गुटों से आर्थिक नाकेबंदी ख़त्म करने की अपील की थी और कहा था कि इस नाकेबंदी के कारण राज्य में आवश्यक वस्तुओं की क़ीमतें आसमान छू रही हैं.

नुक़सान

आर्थिक नाकेबंदी के कारण एक गैस सिलिंडर की क़ीमत 1650 रुपए और पेट्रोल की क़ीमत 120 रुपए प्रति लीटर तक पहुँच गई है.

सदर हिल्स सब डिविज़न को अलग ज़िला बनाने की मांग को लेकर सदर हिल्स डिस्ट्रिक्ट डिमांड कमेटी ने पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 53 और 39 की आर्थिक नाकेबंदी कर दी थी.

अलग ज़िला की मांग करने वाले प्रदर्शनकारी एक अगस्त से इम्फाल-दीमापुर-गुवाहाटी (राष्ट्रीय राजमार्ग 39) और इम्फाल-जिरीबाम-सिलचर (राष्ट्रीय राजमार्ग 53) को घेर कर बैठे थे.

दूसरी ओर इसका विरोध कर रहे यूनाइटेड नगा काउंसिल ने भी 21 अगस्त से दो राष्ट्रीय राजमार्गों की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है.

सदर हिल्स के मुद्दे पर राज्य मंत्रिमंडल की सात बार बैठक भी हुई, लेकिन नगा और कूकी में हिंसा की आशंका से राज्य सरकार कोई फ़ैसला नहीं कर पा रही थी.

1990 के दशक के शुरू में राज्य के पहाड़ी ज़िलों में नगा और कूकियों के बीच हुई हिंसा में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. उस समय नगा अपने वर्चस्व वाले इलाक़ों से कूकियों को खदेड़ना चाहते थे.

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