'कड़े और समन्वित रुख का संकेत दे जी-20'

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Image caption मनमोहन सिंह जी-20 देशों की बैठक में लगातार जाते रहे हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि जी 20 समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लगाने के लिए ‘एक मज़बूत और समन्वित रुख’ का संकेत देगा.

जी-20 की बैठक में हिस्सा लेने जा रहे प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोप और अन्य देशों में आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए कड़े फ़ैसले करने होंगे.

कान में हो रही बैठक से पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ कान सम्मेलन में यह ज़रुरी है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को ठीक करने की दिशा में एक कड़े और समन्वित रुख का संकेत दिया जाए और साथ ही कुछ गंभीर मुद्दों को सुलझाया जाए.’’

उन्होंने कहा कि यूरोज़ोन संकट और यूरोपीय संघों की बैठक के बाद हालात थोड़े बदले हैं लेकिन अभी ऋण संकट से निपटने के लिए कड़े क़दम उठाने की ज़रुरत है.

मनमोहन सिंह का कहना था कि यूरोज़ोन एक ऐतिहासिक परियोजना है. उन्होंने कहा, ‘‘ भारत चाहेगा कि यूरोज़ोन प्रगति करे क्योंकि यूरोप की प्रगति में ही हमारी प्रगति है.’’

प्रधानमंत्री का कहना था कि परस्पर एक दूसरे पर बढ़ती निर्भरता के दौर में अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभावों से सभी चिंतित हैं. उनका कहना था कि ऐसे में विकासशील देशों को बैंकों से ऋण मुहैया कराते रहना ज़रुरी है ताकि वो अपनी मूलभूत ज़रुरतों और आधारभूत संरचना का काम जारी रख सकें.

उनका कहना था कि जी 20 की बैठक में वैश्विक प्रशासन का मुद्दा भी उठेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘ यह मुद्दा भारत के लिए महत्वपूर्ण है और हम चाहेंगे कि विश्व स्तर पर प्रभावी और लोगों के प्रतिनिधित्व वाली व्यवस्था हो ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय और आर्थिक नीतियों में सुधारों को लागू किया जा सके.’’

अपनी जी-20 यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी से द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे. वो अपनी यात्रा में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड और यूरोपीय संघ के नेताओं से भी मुलाक़ातें करेंगे.

माना जा रहा है कि जी-20 की इस बैठक में यूरोज़ोन ऋण संकट पर ही अधिक बातचीत होगी क्योंकि पिछले कुछ महीनों में यूरोज़ोन ऋण संकट का असर दुनिया भर के बाज़ारों पर पड़ा है.

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