अन्ना की कांग्रेस के ख़िलाफ़ प्रचार की चेतावनी

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Image caption अन्ना हज़ारे पिछले 19 दिनों से मौन व्रत पर थे.

जन लोकपाल को लेकर आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को चेतावनी दी है.

दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि अगर जन लोकपाल विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पारित नहीं हुआ तो वो पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के ख़िलाफ़ प्रचार करेंगे.

उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र ख़त्म होने के बाद पहले वो तीन दिनों का अनशन करेंगे और उसके बाद पांचों राज्यों में प्रचार के लिए दौरा करेंगे.

उन्होंने कहा, "हिसार का चुनाव एक प्रयोग था, जिसमें टीम अन्ना की वजह से कांग्रेस के उम्मीदवार की ज़मानत ज़ब्त हो गई, अगर सरकार ने कड़ा लोकपाल लाने का वादा पूरा नहीं किया तो हमें राज्य के चुनावों में भी ये कड़ा क़दम उठाना पड़ेगा."

अन्ना हज़ारे ने कहा कि वो सरकार को धमकी नहीं दे रहे बल्कि उसे याद दिला रहे हैं ताकि वो अपना वादा पूरा करे.

इसपर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि, "रामलीला ग्राउंड में अन्ना हज़ारे ने अनशन तभी तोड़ा था जब ये तय हुआ था कि शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक लाया जाएगा, तो बार-बार इस तरह की टिप्पणियां करने का क्या मतलब है."

मनुसिंघवी ने कहा कि टीम अन्ना पहले तो ये दावा कर रही थी कि वो राजनीति से परे है, तो अब कांग्रेस के ख़िलाफ़ प्रचार की बात क्यों कर रही है.

अन्ना हज़ारे और उनकी टीम लोकपाल विधेयक पर संसद की स्थायी समिति की बैठक में आज हिस्सा ले रही है.

सरकार से मतभेद

पत्रकार वार्ता में अन्ना हज़ारे के सहयोगी वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि गुरूवार को भी लोकपाल विधेयक पर संसद की स्थायी समिति की बैठक में वे शामिल हुए थे, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की.

उन्होंने बताया कि उनकी टीम लोकपाल को एक संवैधानिक स्वरूप देने का विरोध नहीं कर रही, लेकिन इसका तरीक़ा मुश्किल है और इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत है, अगर सरकार ये जुटा पाए तो संवैधानिक प्रारूप भी सही है.

इसके अलावा संविधान की धारा 311 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने सरकार से मांग की है कि किसी सरकारी मुलाज़िम को बर्ख़ास्त करने का अधिकार लोकपाल को होना चाहिए.

धारा 311 के मुताबिक़, किसी सरकारी मुलाज़िम को सरकार ही बर्ख़ास्त कर सकती है और ये फ़ैसला राष्ट्रपति करते हैं.

अन्ना हज़ारे ने ये भी कहा कि, सरकार व्हिसल-ब्लोअर विधेयक और सिटीज़न चार्टर को अलग कर रही है, जिससे लोकपाल कमज़ोर हो जाएगा, अगर अलग धड़े बनाने ही हैं, तो लोकपाल को मज़बूत बनाने का रास्ता ढूंढना होगा.

अन्ना हज़ारे ने कहा कि भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए उत्तराखंड में जो लोकायुक्त विधेयक लाया गया है, वही सभी राज्यों और केंद्र में भी अपनाया जाए. उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में अगले चार-पांच महीने में इसका असर दिखने लगेगा और ग़रीब लोगों को राहत मिलेगी.

इससे पहले शुक्रवार की सुबह अचानक अन्ना हज़ारे महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पहुँच गए और अपना मौन व्रत तोड़ लिया.

बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ये मौन किसी व्यक्ति या पार्टी के विरोध में नहीं था. वे अगस्त में 12 दिन लगातार अनशन के कारण कमज़ोर हो गए थे और बड़ी संख्या में लोग उनसे प्रतिदिन मिलने आ रहे थे, इस कारण उन्हें मौन व्रत के सिवा कोई रास्ता नहीं दिखा.

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