ममता ने दी यूपीए से हटने की धमकी

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Image caption ममता बैनर्जी ने पहली बार यूपीए गठबंधन सरकार के ख़िलाफ़ इतनी नाराज़गी दिखाई है

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बैनर्जी ने पेट्रोल की क़ीमत बढ़ाए जाने पर अपना विरोध व्यक्त करते हुए कहा है कि सहयोगी दलों से चर्चा किए बिना इस तरह से 11 महीनों में 12 बार पेट्रोलियम के दाम बढ़ाना उन्हें मंज़ूर नहीं है.

उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल की बैठक में सांसदों ने यूपीए गठबंधन से हटने का फ़ैसला लिया था लेकिन उन्होंने इसमें संशोधन किया है और अब प्रधानमंत्री के विदेश से लौटने के बाद उनसे चर्चा करके ही कोई फ़ैसला लिया जाएगा.

बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली के अनुसार ममता बैनर्जी ने कहा है कि अभी यूपीए से बाहर आने पर सरकार गिर जाएगी और वे ऐसा नहीं चाहतीं इसलिए वे प्रधानमंत्री के लौटने का इंतज़ार करेंगीं.

पेट्रोल के दाम बढ़ाने का कई और दलों ने तीखा विरोध किया है और इसे जनविरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है.

भारत की तेल कंपनियों ने गुरुवार को आधी रात से पेट्रोल के दामों में 1.83 रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी की घोषणा की है. इससे पहले सितंबर में ही 3.14 रुपए प्रतिलीटर की बढ़ोत्तरी की गई थी.

नाराज़गी

शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस पार्टी के संसदीय दल की एक बैठक हुई थी.

इस बैठक के बाद पार्टी के मुख्य सचेतक सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल गठबंधन के सहयोगियों को अंधेरे में रखकर पेट्रोल के दाम बढ़ाने जैसे निर्णय लेने के लिए यूपीए सरकार से कड़ा विरोध दर्ज करवाना चाहता है."

हालांकि उन्होंने कहा था कि सरकार से समर्थन वापसी पर कोई निर्णय नहीं हुआ है और अंतिम फ़ैसला ममता बैनर्जी ही लेंगीं.

लेकिन बाद में जब वे मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बैनर्जी से मिले उसके बाद ममता बैनर्जी ने कहा कि संसदीय दल ने समर्थन वापसी का फ़ैसला लिया था लेकिन वे इसमें संशोधन कर रही हैं.

उनका कहना था, "हमारे समर्थन वापसी से सरकार गिर सकती है. चूंकि प्रधानमंत्री देश से बाहर हैं, हम उनसे बात करके ही ये निर्णय लेना चाहते हैं. हमने उनसे समय मांगा है."

उनका कहना था, "किसी भी बड़े निर्णय से पहले चर्चा ज़रूरी है."

वर्ष 2009 में यूपीए-2 के गठन के बाद से ममता बैनर्जी ने पहली बार गठबंधन पर इतना खुला हमला किया है.

उनका कहना था कि ये ग़लत है कि इतना बड़ा फ़ैसला प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में लिया गया है. उनका कहना था कि इससे सरकार की छवि ख़राब होती है.

उन्होंने कहा, "हमारी बात मंत्रिमंडल में भी नहीं सुनी जा रही है. हमारे एकमात्र कैबिनेट मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने जब भी जनता से जुड़ा कोई मसला उठाया तो उन्हें चुप करा दिया गया. अब तक हम बर्दाश्त करते रहे और हमने तालमेल बनाए रखा."

नाराज़गी में ममता बैनर्जी ने कहा, "कांग्रेस पार्टी यूपीए सरकार को चलाने के लिए तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी और डीएमके जैसे सहयोगी दलों पर निर्भर है. हम कांग्रेस पर निर्भर नहीं हैं."

उनका कहना था कि इस तरह के फ़ैसलों से आम आदमी पर बोझ बढ़ रहा है.

महंगाई पर असर पड़ेगा-प्रणब

उधर प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि पेट्रोल के दामों में हुई बढ़ोत्तरी का महंगाई पर असर पड़ेगा जो पहले से ही दो अंकों में जा पहुँची है.

उनका कहना था, "निश्चित तौर पर महंगाई पर इसका नाकारात्मक असर पड़ेगा लेकिन लेकिन तेल के दाम बढ़ रहे हैं और सरकार ने पेट्रोल के दामों पर से अपना नियंत्रण ख़त्म कर लिया है."

मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसे 'आधी रात का धोखा' बताया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने पेट्रोल के दाम तुरंत वापस लेने की मांग की है.

यूपीए गठबंधन में शामिल एक और दल डीएमके ने भी सरकार से पेट्रोल के दामों में हुई बढ़ोत्तरी वापस लेने की मांग की है.

डीएमके के नेता और केंद्रीय मंत्री टीआर बालू ने एक टीवी चैनल से हुई बातचीत में कहा, "इसका आम लोगों पर विपरीत असर पड़ेगा इसलिए इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि इस बोझ को किस तरह से कम किया जा सकता है."

हालांकि उन्होंने समर्थन वापस लेने की संभावना से इनकार किया है.

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