बिना आरोप बंद हैं ढाई सौ पाकिस्तानी क़ैदी

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Image caption जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष भीम सिंह ने कैदियों की रिहाई की मांग करते हुए याचिका दायर की थी.

बड़ी संख्या में पाकिस्तानियों के बिना किसी आरोप भारतीय जेलों में रखने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरत जताई है.

ढाई सौ से ज़्यादा पाकिस्तानी क़ैदी कई सालों से भारतीय जेलों में बंद है जिनमें से एक क़ैदी पिछले 40 सालों से जेल में है.

अदालत ने सरकार को क़ैदियों के बारे में दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है.

अदालत ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि 254 पाकिस्तानी क़ैदी बिना किसी सुनवाई के वर्षों से जेलों में बंद हैं.

विशेष अधिकार

जस्टिस आरएन लोधा की अगुआई वाली खंडपीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार 'हमें सबसे प्रिय' है और लोगों को दिया जाने वाला सबसे क़ीमती अधिकार है.

जस्टिस लोधा ने कहा, ''हम यहां हर व्यक्ति के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हैं चाहे वह नागरिक या नहीं.''

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस बात के लिए आलोचना की कि पूरी जानकारी होते हुए भी उसने इसे उपलब्ध नहीं कराया.

जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष भीम सिंह ने क़ैदियों की रिहाई की मांग करते हुए याचिका दायर की थी.

इनमें से अधिकांश कैदी भारत प्रशासित कश्मीर में हैं और जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की ओर से सीमा पार आ गए थे.

याचिका में कहा गया कि चार पाकिस्तानी महिला क़ैदी पिछले 10 सालों से अलग-अलग जेलों में बंद हैं.

अभी ये पता नहीं चल पाया है कि कितने पाकिस्तानी क़ैदी बाक़ी राज्यों की जेलों में हैं.

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