2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले का मुकदमा शुरू

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Image caption पूर्व केंद्रीय दूर संचार मंत्री और द्रमुक नेता ए राजा फ़रवरी 2 2011 से जेल में बंद हैं

आज़ाद भारत के इतिहास का 'सबसे बड़ा घोटाला' कहे जाने वाले टू-जी स्पेक्ट्रम आवंटन में धांधली का मुक़दमा महीनों की जांच और क़ानूनी दावं पेंचों के बाद शुक्रवार को दिल्ली की विशेष अदालत में शुरू हो गया.

विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने सबसे पहले रिलायंस कैपिटल के सहायक उपाध्यक्ष आनंद सुब्रह्मण्यम का बयान लिया.

कुल मिलाकर आने वाले हफ़्तों में अदालत में क़रीब 150 गवाहों के बयान लिए जाएंगे. पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रविड़ मुनेत्र कझगम यानी डीएमके सांसद कनिमोड़ी जैसे अभियुक्तों वाले इस मुक़दमे की निगरानी ख़ुद सुप्रीम कोर्ट कर रहा है.

यूँ तो इस बात पर विवाद है कि ए राजा के विवादास्पद फ़ैसलों से भारत सरकार को कितना नुक़सान पहुँचा लेकिन नियंत्रक एवं महालेखाकार या कैग द्वारा दिए गए 1.76 लाख हज़ार करोड़ के आँकड़े ने जनमानस में पुख़्ता तौर पर अपनी जगह बना ली.

मुख्य अभियुक्त

ए राजा : पूर्व केंद्रीय दूर संचार मंत्री और द्रमुक नेता दो फ़रवरी 2011 से जेल में बंद हैं. इन पर आरोप है कि इन्होने नियम कायदों को दरकिनार कर 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी षड्यंत्रपूर्वक नहीं की. सीबीआई के अनुसार इन्होंने 2008 में साल 2001 में तय की गई दरों पर स्पेक्ट्रम बेच दिया. इसके आलावा राजा पर यह भी आरोप हैं कि उन्होंने अपनी पसंदीदा कंपनियों को पैसे लेकर ग़लत ढंग से स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया.

कनिमोड़ी : द्रमुक सुप्रीमो एम करुणानिधि की यह बेटी राज्य सभा सदस्य हैं और इन पर राजा के साथ मिलकर काम करने का आरोप है. इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने टीवी चैनल के लिए 200 करोड़ रुपयों की रिश्वत डीबी रियलटी के मालिक शाहिद बलवा से ली बदले में उनकी कंपनियों को ए राजा ने ग़लत ढंग से स्पेक्ट्रम दिलाया.

सिद्धार्थ बेहुरा : जब राजा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे तब सिद्धार्थ बेहुरा दूरसंचार सचिव थे. सीबीआई का आरोप है कि इन्होने ए राजा के साथ मिलकर इस घोटाले में काम किया और उनकी मदद की. बेहुरा भी ए राजा के साथ ही 2 फ़रवरी 2011 को गिरफ़्तार हुए थे और तब से जेल में ही हैं.

आर के चंदोलिया: ए राजा के पूर्व निजी सचिव पर आरोप है कि इन्होंने ए राजा के साथ मिलकर कुछ ऐसी निजी कंपनियों को लाभ दिलाने के लिए षड्यंत्र किया जो इस लायक़ नहीं थीं. चंदोलिया भी बेहुरा और राजा के साथ ही 2 फ़रवरी 2011 को गिरफ़्तार हुए थे और तब से जेल में ही हैं.

शाहिद बलवा: स्वॉन टेलिकॉम के महाप्रबंधक बलवा ए राजा के कामों से लाभ उठाने वालों में प्रमुख हैं. सीबीआई का आरोप है कि बलवा की कंपनियों को जायज़ से कहीं कम दामों पर स्पेक्ट्रम आवंटित हुआ. बलवा आठ फ़रवरी 2011 से जेल में बंद हैं.

संजय चंद्रा: यूनिटेक के पूर्व महाप्रबंधक की कंपनी भी इस घोटाले में सीबीआई के अनुसार सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक है. स्पेक्ट्रम लेने के बाद उनकी कंपनी ने स्पेक्ट्रम को विदेशी कंपनियों को ऊँचे दामों पर बेच दिया और मोटा मुनाफ़ा कमाया. चंद्रा 20 अप्रैल 2011 से जेल में बंद हैं.

विनोद गोयनका: स्वॉन टेलिकॉम के निदेशक पर सीबीआई ने आरोप लगाया है की उन्होंने अपने साझीदार शाहिद बलवा के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र में भाग लिया.

गौतम दोषी, सुरेन्द्र पिपारा और हरी नायर: अनिल अंबानी समूह की कम्पनियों के यह तीन शीर्ष अधिकारी हैं. इन तीनों पर भी षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप है. साथ ही सीबीआई का इन पर धोखाधड़ी को बढ़ावा देने का भी आरोप है. यह तीनों अधिकारी भी 20 अप्रैल 2011 से जेल में बंद हैं.

राजीव अग्रवाल : कुसगाँव फ्रूट्स और वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पर आरोप है कि उनकी कंपनी से 200 करोड़ रुपए रिश्वत के लिए करीम मोरानी की कंपनी सिनेयुग को दिए गए जो आख़िरकार करुणानिधि की बेटी कनिमोड़ी तक पहुँच गए. राजीव अग्रवाल 29 मई 2011 को जेल भेज दिए गए.

आसिफ़ बलवा: शाहिद बलवा के भाई कुसगावं फ्रूट्स और वेजीटेबल प्राइवेट लिमिटेड में 50 फ़ीसदी के हिस्सेदार थे और इस जुर्म में भी साझीदार. राजीव अग्रवाल के साथ आसिफ़ बलवा भी 29 मई 2011 को जेल भेज दिए गए. करीम मोरानी : सिनेयुग मीडिया और एंटरटेनमेंट के निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने कुसगावं फ्रूट्स और वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड से 212 करोड़ रुपए लिए और कनिमोड़ी को 214 रुपये रिश्वत के दिए ताकि शहीद बलवा की कंपनियों को गलत ढंग से स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाये. मोरानी मार्च 30 से जेल में बंद हैं.

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