मायावती ने फिर खेला ब्राह्मण कार्ड

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Image caption मायावती ने अगले चुनावों के लिए पूरी तैयारी शुरु कर दी है.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने ब्राह्मण समुदाय को इस बात का डर दिखाया है कि अगर अगले विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में कांग्रेस या भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो यहाँ फिर ठाकुरों का सामंतवादी शासन हो जाएगा.

राजधानी लखनऊ में ‘बीएसपी ब्राह्मण भाईचारा सम्मलेन’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मायावती ने ब्राह्मण समुदाय को सावधान किया कि, “हमारी पार्टी को खास सूत्रों से मालूम हुआ है कि विरोधी पार्टियों खासकर कांग्रेस और बीजेपी ने अंदर से रणनीति बनायी है कि यदि विधान सभा के आम चुनाव में इन दोनों पार्टियों को सरकार बनाने का मौक़ा मिलता है तो कांग्रेस दिग्विजय सिंह को और बीजेपी को मौक़ा मिलता है तो फिर राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.”

मायावती ने संभावना जताई कि उनके इस खुलासे के बाद ये पार्टियां ब्राह्मण समाज का वोट हासिल करने के लिए किसी ब्राह्मण का नाम मुख्यमंत्री के लिए घोषित कर दें.

थोडा और भय पैदा करते हुए मायावती ने कहा कि यदि लोगों के किसी तरह गुमराह होने से कांग्रेस या बीजेपी का सपना साकार होता है तो सामंतवादी शक्तियां पहले की तरह फिर लोगों का शोषण करेंगी.

इस तरह का डर दिखाने के बाद मायावती ने ब्राह्मण समुदाय से अपील की कि वे बहुजन समाज पार्टी को फिर से सता में लाने के लिए सन 2007 की तरह इस बार भी सहयोग करें.

आरक्षण

मायावती ने ब्राह्मण समुदाय को उनके सम्मान की रक्षा और हितों का ध्यान रखने का भरोसा दिलाया. उन्होंने यह भी दोहराया कि बीएसपी शिक्षा और नौकरियों में ब्राह्मण एवं अन्य ऊँची जातियों के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की पक्षधर है.

याद दिला दें कि पिछले विधान सभा चुनाव में मायावती ने राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग का सफल प्रयोग करते हुए बड़े पैमाने पर ब्राह्मण समुदाय के लोगों को टिकट दिया था.

एडवोकेट सतीश चंद्र मिश्र पार्टी के माहासचिव बनाए गए थे , जिन्होंने जिलों में ब्राह्मण सम्मलेन करके मायावती के लिए समर्थन माँगा था.

लेकिन बाद में ब्राह्मण समुदाय में इस बात की नाराजगी पैदा हुई कि माया सरकार में केवल सतीश मिश्र के परिवार और रिश्तेदारों को फायदा मिला.

मायावती ने अपने भाषण में इस बात की सफाई दी कि सतीश मिश्र की बहनों और रिश्तेदारों को पार्टी में उनके योगदान के कारण सरकार में पद दिए गए.

इसी तरह उन्होंने ऊर्जा मंत्री राम वीर उपाध्याय , लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी और पंचायती राज मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के परिवार के लोगों को भी विधान सभा या विधान परिषद के टिकट देने के बारे में सफाई दी.

रैली में आए कई लोगों को इस बात की शिकायत थी कि बीएसपी ने पिछली बार सरकार बनाने के लिए उनका वोट तो ले लिया , लेकिन ब्राह्मण समुदाय की तरक्की के लिए कुछ नहीं किया.

मायावती पर जातिवादी होने का आरोप

मुख्यमंत्री मायावती बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने उन पर जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाया है.

कांग्रेस ने कहा है कि मायावती अगर सोचती हैं कि जातिवाद उनकी चुनावी नैया पार हो जाएगी तो जनता आगामी चुनाव में उनकी ग़लतफ़हमी दूर कर देगी.

वहीं भाजपा ने कहा है कि मायावती ने अपने कार्यकाल में नौकरशाही का भी जातीयकरण कर दिया है.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रीता बहुगुणा ने कहा कि मायावती के कार्यकाल में ब्राह्मण ख़ुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रहा है.

उन्होंने एक बयान में कहा है, "चार बार मुख्यमंत्री रहने के बाद भी मायावती अपनी जातिवादी मानसिकता से उबर नहीं पाई हैं. जबकि प्रदेश की जनता जात-पात को भूलकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती है."

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने बसपा प्रमुख और मुख्यमंत्री मायावती के 'ब्राह्मण भाईचारा सम्मेलन' को सरकारी नौटंकी की संज्ञा देते हुए मुख्यमंत्री के बयान को हास्यास्पद बताया है.

प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता हृदयनारायण दीक्षित ने कहा, "मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि ऐसे बड़े ब्राह्मण प्रेम के बावजूद उन्होंने अपनी सरकार में किसी सवर्ण को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या गृहमंत्री क्यों नहीं बनाया?"

भाजपा ने मायावती पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने नौकरशाही का भा जातीयकरण कर दिया है.

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