चंद्रबाबू की संपत्ति की जाँच के आदेश

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Image caption चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वे हर तरह की जाँच के लिए तैयार हैं

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने तेलुगू देसम पार्टी के अध्यक्ष और विधान सभा में विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू की संपत्ति की प्रारंभिक जांच का आदेश दिया है.

वाईएसआर कांग्रेस की अध्यक्ष वाईएस विजय लक्ष्मी की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने सीबीआई से कहा कि वो तीन महीने के अंदर छान-बीन पूरी करते हुए अपनी रिपोर्ट पेश करे.

उच्च न्यायालय की जस्टिस ग़ुलाम मोहम्मद और जस्टिस एन राममोहन राव की खंडपीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को भी छानबीन का निर्देश दिया है.

विधानसभा सदस्य विजय लक्ष्मी ने दो हज़ार पन्नों से भी ज़्यादा लंबी अपनी याचिका में चंद्रबाबू नायडू पर भ्रष्ट तरीक़े से संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया और कहा है कि उनकी संपत्ति में सिंगापुर में अवैध तरीक़े से बनाया गया एक स्टार होटल भी शामिल है.

विजय लक्ष्मी ने कई दूसरे पूँजीपतियों और उद्योगपतियों के साथ चंद्रबाबू नायडू के घनिष्ठ संबंधों का उल्लेख करते हुए उनके विरुद्ध भी छानबीन का अनुरोध किया था.

इनमें सुजाना ग्रुप के वाईएस चौधरी और सीएम रमेश भी शामिल हैं. चंद्रबाबू नायडू के अलावा अदालत ने जिन 13 व्यक्तियों के विरुद्ध भी छानबीन के आदेश दिए हैं, उनमें नायडू की पत्नी भुबनेश्वरी और उनकी कंपनियाँ, पुत्र लोकेश नायडू, रामोजी राव और उनकी कंपनियाँ और एक अभिनेता मुरली मोहन भी शामिल हैं.

दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की विजय लक्ष्मी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि जब नायडू 1995 से 2004 तक राज्य के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने कई घोटाले किए और बड़े पैमाने पर संपत्ति जमा की.

चंद्रबाबू नायडू ने अपनी पहली प्रतिक्रया में कहा है कि वो किसी भी छानबीन का सामना करने के लिए तैयार हैं. नायडू ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि उच्य नायालय ने उन्हें कोई नोटिस दिए बिना ही छानबीन का आदेश दिया है.

उन्होंने कहा कि इससे पहले कांग्रेस सरकार ने उनके विरुद्ध 24 बार छानबीन के आदेश दिए थे और अदालतों में 18 मामले दर्ज किए थे लेकिन उनके विरुद्ध एक भी आरोप सही नहीं निकला.

आरोप

तेलुगू देसम पार्टी के दूसरे नेताओं ने आरोप लगाया कि जगनमोहन रेड्डी ने राजनैतिक बदले की भावना से उनकी माँ की ओर से यह याचिका अदालत में दायर की थी क्योंकि इससे पहले तेलुगू देसम नेताओं की याचिका पर उच्च न्यायालय ने जगन के विरुद्ध भी सीबीआई को ऐसे ही छानबीन का आदेश दिया था.

विधायक आर चंद्रशेखर रेड्डी ने कहा कि नायडू एक साफ़ सुथरी छवि रखने वाले ऐसे एकमात्र नेता हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति की पहले ही घोषणा कर दी है और यह भी कह दिया है कि अगर उनके पास कुछ भी संपत्ति निकलती है, तो जो उसे सिद्ध करेगा वो संपत्ति उसी को दे देंगे.

नायडू से सितंबर में अपनी संपत्ति की घोषणा की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके और उनके परिवार के पास कुल मिलकर 38 करोड़ रूपए की संपत्ति है. लेकिन उनके राजनैतिक विरोधियों का आरोप था कि नायडू ने अपनी संपत्ति बहुत कम करके दिखाई है और उसका असल मूल्य कहीं ज़्यादा है.

यह पूछने पर कि क्या तेलुगू देसम इस आदेश के विरुद्ध अदालत में अपील करेगी, रेड्डी ने कहा कि जब तक अदालत के आदेश की कॉपी नहीं मिल जाती, इस पर कोई टिपण्णी नहीं की जा सकती.

दूसरी और प्रदेश कांग्रेस कध्यक्ष बी सत्यनारायण ने कहा कि अब समय आ गया है कि नायडू अपनी ईमानदारी साबित करें. उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश से पहले ही चंद्रबाबू नायडू को ख़ुद ही सीबीआई की छानबीन की मांग करनी चाहिए थी.

उच्च न्यायालय ने नायडू की संपत्ति की प्रारंभिक छानबीन का आदेश एक ऐसे समय दिया है, जब सीबीआई पहले ही से जगनमोहन रेड्डी की संपत्ति की छानबीन कर रही है. जिसमें बंगलौर और हैदराबाद में स्थित उनके दो महल जैसे घर और 50 से ज़्यादा कंपनियाँ शामिल हैं.

जगन ने भी आरोप लगाया था कि कांग्रेस और तेलुगू देसम की मिली-भगत से ही उनके विरुद्ध यह छानबीन करवाई जा रही है.

ऐसी संभावनाएँ व्याप्त की जा रही हैं कि आमदनी से ज़्यादा संपत्ति रखने के मामले में सीबीआई कभी भी जगन को गिरफ़्तार कर सकती है.

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