मानहानि मामले में न्यूज़ चैनल पर सौ करोड़ का दावा

Image caption सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद टाइम्स ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड से संबंधित यह मामला हाईकोर्ट में जारी रहेगा.

एक भारतीय समाचार चैनल ‘टाइम्स नाओ’ के खिलाफ़ दायर किए गए सौ करोड़ के मानहानि के मुक़दमे में सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले में दख़ल देने से इंकार करते हुए अदालत में पैसे जमा कराए जाने को सही ठहराया है.

यह मामला साल 2008 का है जब समाचार चैनल ने धोखाधड़ी के एक मामले में गलती से सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायधीश की तस्वीर जारी कर दी थी. यह गलत तस्वीर 15 सेकेंड के लिए टेलिविज़न पर जारी रही थी.

इसके हर्जाने के रुप में निचली अदालत ने समाचार चैनल को कोर्ट में 20 करोड़ रुपए नकद और 80 करोड़ रुपए बैंक गारंटी के रुप में जमा कराने का आदेश दिया था.

सोमवार को सुनाए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में उसे कोई गलती नहीं दिखती और इस फैसले में दख़ल के लिए उनके पास कोई कारण नहीं.’

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद टाइम्स ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड से संबंधित यह मामला हाईकोर्ट में जारी रहेगा.

इस बीच ‘टाइम्स नाओ’ के मुख्य संपादक अरनब गोस्वामी ने सोमवार शाम इस मामले को लेकर पूर्व जज पीबी सांवत से माफ़ी मांगते हुए कहा कि चैनल इस गलती से जस्टिस सावंत की छवि को हुए नुकसान के लिए माफ़ी मांगता है और यह भूल ब्रॉडकास्ट के दौरान 15 सेकेंड के लिए हुई एक गड़बड़ी का नतीजा है.

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