अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण

विजय कुमार सारस्वत, डीआरडीओ प्रमुख
Image caption सारस्वत ने कहा कि भारत मिसाइल तकनीक के मामले में किसी भी विकसित देश से पीछे नहीं है.

भारत ने मंगलवार को उड़ीसा के व्हीलर द्वीप से तीन हज़ार किलोमीटर से अधिक दूरी तक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि-4 का सफल प्रक्षेपण किया.

बुधवार को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के महानिदेशक और रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार विजय कुमार सारस्वत ने दिल्ली में पत्रकारों को इसकी जानकारी दी.

इस मौक़े पर उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के प्रेक्षपण के बाद कहा जा सकता है कि भारत मिसाइल तकनीक के मामले में किसी भी दूसरे देश से कम नहीं है.

प्रक्षेपण से पहले अग्नि-4 को अग्नि-2 प्राइम के नाम से जाना जाता था.

परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लगभग एक हज़ार किलोग्राम के पैलोड क्षमता वाले अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल दो हज़ार किलोमीटर की मारक क्षमता वाले पहले के अग्नि-2 मिसाइल का ही उन्नत रूप है.

गौरतलब है कि पहली बार इसका प्रक्षेपण पिछले साल दिसंबर में हुआ था लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से ये सफल नहीं हो पाया था.

डॉक्टर सारस्वत ने बताया कि इस साल के अंत तक अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण करने की भी योजना है.

अग्नि-5 की मारक क्षमता पांच हज़ार किलोमीटर की होगी.

मारक क्षमता

संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों के ये पूछने पर कि इस सफल प्रक्षेपण के बाद भारत अपने पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के मुक़ाबले कहां खड़ा है, डॉक्टर सारस्वत ने कहा कि भारत अपने किसी भी पड़ोसी देश या दूसरे किसी से भी हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं है.

Image caption अग्नि-4 मिसाइल की प्रोजेक्ट निदेशक टेसी थॉमस हैं.

सारस्वत का कहना था, ''हमने जितने मिसाइल बनाएं हैं वो हमारी सुरक्षा ज़रूरतों को मद्देनज़र रखते हुए बनाए हैं. हम ये नहीं सोच रहें हैं कि हमारे विरोधियों के पास क्या है. हमें उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.''

डॉक्टर सारस्वत ने कहा कि तकनीकी रूप से देखा जाए तो भारत के पास वो सारी तकनीक है जो विकसित देशों के पास है.

उनके अनुसार ज़रूरत पड़ने पर भारत के पास सात हज़ार किलोमीटर तक मारक क्षमता वाले मिसाइल बनाने की तकनीक मौजूद है.

उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत इसलिए उतनी लंबी दूरी तक मारक क्षमता वाले मिसाइल नहीं बना रहा है क्योंकि उसे इसकी ज़रूरत नहीं है.

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