ऑनर किलिंग: आठ को फाँसी की सज़ा

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मथुरा की एक अदालत ने बीस साल पहले हुए एक क्रूरतम ऑनर किलिंग के मामले में आठ लोगों को फाँसी और 27 लोगों को आजीवन कारवास की सज़ा सुनाई है.

मथुरा में हुआ पूरा मामला 22 मार्च 1991 का है. हरियाणा की सीमा पर स्थित मेहराना गाँव में एक जाटव लड़के विजेन्द्र ने अपनी प्रेमिका जाट समुदाय की लड़की रोशनी के साथ भाग कर शादी कर ली थी. लड़के के चचेरे भाई राम किशन ने इस काम में उसकी मदद की.

ये लोग यह सोचकर पांच दिन बाद गाँव वापस आ गए कि अब परिवार के लोगों का ग़ुस्सा शांत हो गया होगा.

लेकिन उत्तेजित जाट समुदाय के लोगों ने पंचायत बुलाकर तीनों को फाँसी सुना दी. यह भी कहा गया कि फाँसी देने के काम लड़को के माँ-बाप ही करेंगे.

घटना

फिर दोनों लड़कों के गुप्तांग जला दिए गए. जब वे बेहोश हो गए तो उन्हें बरगद के पेड़ से फाँसी पर लटका दिया गया.

जाटव लड़की के परिवार वालों ने पंचायत करके इस तरह की क्रूर हत्या करने वाले लोगों पर मुक़दमा क़ायम कराया. उन्हीं की गवाही और पैरवी के आधार पर कोर्ट ने अभियुक्तों को दोष सिद्ध करार दिया.

लेकिन बचाव पक्ष के वकील ने फाँसी की सज़ा पर आपत्ति जताई वो भी जज को बीच में ही रोककर. वकील ने अपने तर्क के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का हवाला दिया.

वकील का तर्क सुनकर जज अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एके उपाध्याय अपने चैंबर में चले गए. पुनर्विचार के बाद कोर्ट ने सात लोगों की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया क्योंकि वे काफ़ी बूढ़े थे.

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