मालेगांव धमाकों के सात अभियुक्त रिहा

2006 मालेगांव धमाके इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption मालेगांव बम धमाकों के नौ में से सात अभियुक्तों को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है

वर्ष 2006 में मालेगांव में हुए बम धमाकों के सिलसिले में मुंबई की एक जेल में बंद नौ में से सात अभियुक्तों को अदालत ने ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है.

रिहा होने वाले अभियुक्त पांच साल जेल में बिता चुके हैं. अदालत ने इन्हें 50 हज़ार रूपए के निजी मुचलके पर ज़मानत दी. अदालत ने अभियु्क्तों को सप्ताह में एक बार स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाज़िरी देने का भी निर्देश दिया है.

पिछले सप्ताह पाँच नवंबर को ही मकोका ( महाराष्ट्र संगठित अपराध निरोधक क़ानून) अदालत ने इनकी ज़मानत याचिका मंज़ूर कर ली थी. इनकी ज़मानत के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत में विरोध नहीं किया था.

रिहा किए गए छह अभियुक्तों में से पांच- सलमान फ़ारसी, शबीर अहमद, नूरुलहुदा दोहा, रईस अहमद, मोहम्मद ज़ाहिद और फ़ारूख़ अंसारी मुंबई की आर्थर रोड जेल में और एक अन्य अबरार अहमद बायकुला जेल में बंद थे.

सबूत

जेल में बंद बाक़ी के दो अभियुक्तों आसिफ़ ख़ान और मोहम्मद अली, ज़मानत मिलने के बावजूद रिहा नहीं किया गया क्योंकि ये मुंबई बम धमाकों के भी अभियुक्त हैं.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी का कहना था कि 2007 में मक्का मस्जिद बम धमाके मामले में गिरफ़्तार स्वामी असीमानंद के मालेगांव धमाके में एक दक्षिणपंथी गुट के तथाकथित तौर पर शामिल होने की बात कबूलने के बाद उसने महाराष्ट्र एटीएस और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी जांच एजेंसियों की ओर से इकट्ठा किए गए सबूतों की फिर से समीक्षा की और साथ ही कुछ नए सबूत भी जुटाए.

एनआईए ने अदालत को बताया था, "काफ़ी विचार-विमर्श के बाद सभी तथ्यों और हालातों को ध्यान में रखकर सभी नौ अभियुक्तों की ज़मानत याचिका का विरोध न करने का फ़ैसला किया गया था."

आठ सितंबर 2006 को मालेगांव की हमीदिया मस्जिद के नज़दीक धमाकों में 37 लोग मारे गए थे और 100 से ज़्यादा घायल हो गए थे.

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