शीतकालीन सत्र से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी

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Image caption मानसून सत्र में ही उठाए गए मुद्दों पर ही इस बार भी हंगामा होने की आशंका है.

इस साल मानसून सत्र में भ्रष्टाचार और महंगाई के अलावा कई मुद्दों पर संसद में भारी हंगामा हुआ जिसकी वजह से संसद की कार्रवाई रुकी रही और कई महत्वपूर्ण काम नहीं हो सके.

संसद के शीतकालीन सत्र में हंगामे की संभावनाओं को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सभी दलों से बातचीत के लिए आज एक सर्वदलीय बैठक बुलाई.

बैठक के बाद लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि सभी दलों ने इच्छा जताई है कि संसद का आगामी सत्र फलदायी साबित हो और कम से कम समय की बर्बादी हो.

लेकिन विभिन्न पार्टियों के तेवर उनके इस आश्वासन से परे ही थे. एक ओर जहां कुछ पार्टियों ने कहा कि वे संसद के समय का सदुपयोग करेंगें, वहीं कुछ पार्टियों की मंशा सरकार को घेरने की ही लग रही है.

बैठक के बाद मुख्य विपक्षी दल भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने कहा, “कुल मिलाकर सभी दलों ने और नेताओं ने अपने अपने मुद्दे रखे. हमने अपनी ओर से आठ विषय चर्चा के लिए और चार विषय ध्यानाकर्षण के तौर पर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखे हैं.”

जहां सुषमा स्वराज ने पार्टी की रणनीति को लेकर चुप्पी साधे रखी, वहीं सीपीआई के गुरुदास दासगुप्ता ने यूपीए सरकार की ओर कड़ा रूख अपनाते हुए कहा कि वे महंगाई पर लगाम कसने की सरकार की नाकामी को लेकर शीतकालीन सत्र में स्थगन प्रस्ताव लाएंगे.

कड़े तेवर

गुरुदास दासगुप्ता ने कहा, “पिछले सत्र में सरकार ने प्रस्ताव पारित कर कहा था कि वे महंगाई पर काबू पाने की कोशिश करेगी. लेकिन चूंकि सरकार इसमें नाकाम रही है, इसलिए हम आगामी सत्र में स्थगन प्रस्ताव लाएंगें. दूसरे महत्तवपूर्ण मुद्दें जो चिंता का विषय हैं, वे हैं कमज़ोर आर्थिक स्थिति और रुपए का गिरता मूल्य. इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं, लेकिन एक वजह ये भी है कि सरकार ने ग़लत नीतियों को धारण किया है जिसका बुरा परिणाम पूरे देश को झेलना पड़ रहा है.”

उधर जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने भी सरकार को घेरने का इशारा करते हुए कहा, “सीएजी ने जो और मामलों में अपनी रिपोर्ट दी है, चाहे वो एयर इंडिया का मामला हो, केजी बेसिन का मामला हो, ये सब मामले ढीले से पड़ गए हैं. इन मुद्दों को फिर गरम किया जाएगा. पेट्रोल और महंगाई आपस में जुड़े हुए हैं. इतने सारे मुद्दों के बीच विपक्ष ये क्यों चाहेगा कि सत्र बंद हो?”

मॉनसून सत्र से ही चर्चा में बना हुए लोकपाल विधेयक पर सभी पार्टियों का रुख़ एकजुट नज़र नहीं आया.

टीम अन्ना ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस सत्र में लोकपाल विधेयक पारित नहीं किया गया, तो वे कांग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ विभिन्न राज्यों में प्रचार करेंगें.

लोकपाल पर असमंजस

राजग अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा, “हम बेहतर लोकपाल विधेयक बना रहे हैं. इस सत्र में ये विधेयक आएगा या नहीं, इस पर कोई टिप्पणी तो मैं नहीं कर सकता, लेकिन हम विधेयक के मसौदे पर बातचीत कर रहे हैं.”

लेकिन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने लोकपाल के मुद्दे पर कहा, “हमारे प्रधानमंत्री ने, हमारी यूपीए अध्यक्ष और कानून मंत्री ने सरकार की तरफ़ से एक सशक्त और मज़बूत लोकपाल विधेयक संसद के सत्र में लाने की बात कही है. अब आपको इंतज़ार तो करना ही पड़ेगा. स्थाई समिति विधेयक को जैसे ही तैयार करती है, वैसे ही वो कैबिनेट में जाएगा और उसके बाद विधेयक संसद में आएगा. फिर उस पर बहस होगी ये देखने के लिए कि वो विधेयक कितना सशक्त है.”

विभिन्न मुद्दों पर पार्टियों की विभिन्न राय को देखते हुए आगामी सत्र में हंगामे के ही आसार दिखाई पड़ रहे हैं.

एक बार फिर काले धन, भ्रष्टाचार, 2जी घोटाले, महंगाई और लोकपाल के मुद्दों पर सरकार से सवाल किए जाएंगें और कांग्रेस को घेरने की कोशिश की जाएगी.

इसके साथ-साथ तेलंगाना और मणिपुर में चल रहे विरोध प्रदर्शन, खाद्य सुरक्षा बिल, जमीन अधिग्रहण बिल, सांप्रदायिक दंगा बिल पर जारी विवाद को लेकर भी विपक्ष प्रश्न कर सकता है.

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