किशनजी की मौत से 'क्षणिक झटका'

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Image caption किशनजी की मौत की जाँच की माँग उठ रही है

माओवादियों ने अपने नेता कोटेश्वर राव यानी किशनजी की कथित तौर पर पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर ज़िले में हुई मुठभेड़ में मौत के ख़िलाफ़ दो दिनों के बंद का आह्वान किया है.

बंद का आह्वान भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की बंगाल कमेटी की तरफ़ से किया गया है. माओवादियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके नेता को एक दिन पहले ही गिरफ़्तार किया था और बाद में उन्हें 'सुनियोजित ढंग से मार दिया गया'.

इस तरह किशनजी की मौत को लेकर विवाद छिड़ गया है.

कौन थे किशन जी

एक ओर जहाँ बंगाल के मार्क्सवादी भी मामले की जाँच की माँग कर रहे हैं वहीं मानवाधिकार संगठनों का भी आरोप है कि किशनजी को 'फ़र्ज़ी मुठभेड़' में मारा गया है.

शुक्रवार को 26 संगठनों ने मिलकर एक बयान जारी किया है जिसमें घटना की उच्च-स्तरीय जाँच कराने की माँग की गई है. कोऑर्डिनेशन ऑफ़ डेमोक्रेटिक राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन्स (सीडीआरओ) के बैनर तले जिन संगठनों ने इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं उनमें प्रमुख रूप से पीयूडीआर, पीयूसीएल, एपीडीआर और एपीसीएल आदि संगठन शामिल हैं. सीडीआरओ के संयोजक आशीष गुप्ता ने बीबीसी को बताया है कि यह सभी संगठन घटना के विरोध में अदालत का दरवाज़ा भी खटखटाएंगे.

जाँच की माँग

उन्होंने कहा, "यह मुठभेड़ नहीं थी बल्कि हत्या है. इसकी हम निंदा करते हैं. हम माँग करते हैं कि इसकी उच्च स्तरीय जाँच हो. अगर सरकार घटना की जाँच नहीं कराती है तो हम अदालत जाएँगे." किशनजी की मौत से माओवादियों को बड़ा झटका तो ज़रूर लगा है मगर जानकारों का मानना है कि इससे संगठन के छापामार तरीक़ों में कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

अलबत्ता इतना ज़रूर है कि सुरक्षा बलों के लिए यह घटना मनोबल ऊँचा करने वाली है.

सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह मानते हैं कि एक लंबे अरसे से सुरक्षा बलों के लिए कोई अच्छी ख़बर नहीं थी. वह कहते हैं, "किशनजी का मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए उत्साहवर्धक ज़रूर है." मगर प्रकाश सिंह को भी लगता है कि माओवादियों के लिए किशनजी की मौत का झटका क्षणिक ही है. उनका कहना है, "यह तो चलता रहेगा. कोई दूसरा किशनजी पैदा हो जाएगा." वहीं सामाजिक कार्यकर्ता शशिभूषण पाठक को भी लगता है कि किशनजी की मौत से माओवादियों को कोई ज़्यादा असर नहीं पड़ने वाला है. वह कहते हैं कि किशनजी बेशक मारे गए हों मगर वह विचार तो ज़िंदा है जिसको लेकर इतने सारे लोग लामबंद हुए हैं. बहरहाल किशनजी की मौत को लेकर कई राज्यों में अलर्ट जारी कर दिया गया है. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि किशनजी की मौत के ख़िलाफ़ माओवादी छापामार हिंसक वारदातों को अंजाम दे सकते हैं.

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