टैगोर की जाली पेंटिंग्स की जांच की मांग

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Image caption टैगौर कवि, संगीतकार और चित्रकार के रूप में विख्यात थे

भारतीय कलाकारों ने नोबेल पुरुस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर के 'जाली चित्रों' को एक प्रदर्शनी में दिखाए जाने की जांच की मांग की है.

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के मुताबिक इस साल फ़रवरी में कोलकाता के 'गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्ट एंड क्राफ़्ट' में एक चित्र प्रदर्शनी में टैगोर की जाली पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई थी.

विभाग के अनुसार इस प्रदर्शनी में 23 पेंटिंग्स लगाई गई थी जिनमें से 20 जाली चित्र थे.

ये प्रदर्शनी टैगोर के सम्मान में आयोजित की गई थी.

नकली तस्वीरें

कोलकाता में टैगोर को एक हीरो का दर्जा प्राप्त है. टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और कवि, संगीतकार और पेंटर के रूप में विख्यात थे. साल 1913 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरुस्कार मिला था जो किसी भी ग़ैर यूरोपीय को मिलने वाला पहला नोबेल पुरस्कार था.

इस साल की शुरुआत में टैगोर के 150वीं वर्षगांठ के मौके पर कोलकाता में भव्य समारोहों का आयोजन हुआ था. इसी कड़ी में एक कॉलेज में टैगोर के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई थी.

लेकिन जैसे ही ये प्रदर्शनी शुरु हुई, कोलकाता के कई जानेमाने कलाकारों ने कई चित्रों को जाली क़रार दिया.

Image caption कीव़ में टैगौर के तस्वीरों की प्रदर्शनी. (फ़ाइल तस्वीर)

इस मामले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपनी खोज के बाद पाया कि इनमें से 20 चित्र तो निश्चित तौर पर जाली थीं.

ऐसा लगता है कि प्रदर्शनी के बाद इन चित्रों को बेचे जाने का मकसद रहा होगा.

जांच हो

चित्रकार शुवाप्रसन्ना उन पहले कलाकारों में से हैं जिन्होंने इन तस्वीरों के नकली होने की आवाज़ उठाई थी.

वो कहते हैं, "हमें तुरंत समझ में आ गया था कि न सिर्फ़ ये जाली हैं बल्कि टैगोर की बेहद कमज़ोर नकल है. अब ये मेरी उम्मीद है, हम सबकी उम्मीद है, कि ये जिसकी भी कारस्तानी थी उसका पर्दाफ़ाश हो."

साल 2004 में एक संग्रहालय से टैगोर का नोबेल पदक भी चोरी हो गया था. अधिकारी मानते हैं कि उसे किसी निजी संग्राहक को बेच दिया गया था. पुलिस को सात सालों में अब तक पता नहीं चला है कि चोरी आख़िर किसने की थी.

अब इस ताज़ा मामले में भी लोगों को डर है कि कहीं ये धोखा भी एक रहस्य बन कर न रह जाए.

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