खुदरा बाजार में विदेशी निवेश: यूपीए में दरार?

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Image caption अपुष्ट ख़बरों के मुताबिक सभी दलों में आम सहमति बनाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

संसद के दोनों सदनों में शीतकालीन सत्र के पांचवे दिन भी कोई कामकाज नहीं हो पाया. लेकिन आज विपक्ष के विरोधी स्वरों में सत्ताधारी दलों की आवाज़ें भी शामिल दिखीं.

एनडीए के घटक दलों और वाम दलों समेत विपक्ष एकजुट दिखा तो यूपीए के सहयोगी दलों में दरारें नज़र आईं.

महंगाई और काले धन के बाद आज बहस का मुद्दा था खुदरा व्यापार क्षेत्र में एक से ज़्यादा ब्रांड के लिए एफ़डीआई को दी गई मंत्रिमंडल की मंज़ूरी.

दोनों सदनों में ही सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी हुई जिसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई.

यूपीए सरकार के सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने लोकसभा से बाहर आकर पत्रकारों के बताया, “हम लोग अध्यक्ष की कुर्सी तक नहीं गए, लेकिन अपनी सीटों से थोड़ा आगे खड़े होकर हमने भी शोर मचाया, हमारी पार्टी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करती है और हम चाहते हैं कि ये फ़ैसला वापस ले लिया जाए”.

साथ ही डीएमके प्रमुख के करुणानिधि ने भी एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया है कि उनकी पार्टी इस फ़ैसले का विरोध करती है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग करती है.

बयान में लिखा है, “अगर खुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश को अनुमति दी गई तो इससे भारत को बहुत नुकसान होगा और छोटे व्यापारियों की जीविका छिन जाएगी”.

यूपीए को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह ने भी अपना विरोध साफ करते हुए कहा, “हमारी पार्टी सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ है और ये विरोध हम सड़कों तक ले जाएंगे ताकि छोटे व्यापारियों और किसानों को इस बारे में समझा सकें”.

विपक्ष की मांग

संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे हफ्ते में कामकाज ना होने की सारी ज़िम्मेदारी आज विपक्षी दलों ने कांग्रेस सरकार पर ही डाल दी.

लोकसभा में नेता, विपक्ष, सुष्मा स्वराज ने एक पत्रकार वार्ता की और कहा कि सरकार चाहे तो सत्र चल सकता है.

उन्होंने कहा, “सरकार के सहयोगी दल और उन्हे बाहर से समर्थन दे रहे दलों में ही जब इस फ़ैसले पर असहमति है, तो सरकार क्यों हेकड़ी दिखाते हुए ये फ़ैसला ले रही है, पूरा विपक्ष भी इसके विरोध में है, हम मांग करते हैं कि इसे फौरन वापस लिया जाए.”

वाम नेता सीतीराम येचुरी ने भी कहा कि वर्ष 2004 से खुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश पर बहस चल रही है, इतना विवादास्पद मुद्दा होने की वजह से इसपर बहस होनी ज़रूरी है.

इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात की और राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक अन्य मुद्दों के अलावा, दोनों ने संसद के मौजूदा सत्र के बारे में भी चर्चा की.

स्थानीय मुद्दों का साया

संसद के इस सत्र में पहले दिन से ही विरोध सिर्फ एनडीए और वाम दलों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर ही नहीं हो रहा.

महंगाई, काला धन और अब विदेशी पूंजी निवेश के अलावा स्थानीय मुद्दे भी विरोध का केन्द्र रहे हैं.

आज लोकसभा में केरल से कांग्रेस और वाम दल के सांसदों ने मुल्लापेरियर बांध के मुद्दे पर ख़ूब नारेबाज़ी की और पोस्टर्स दिखाए.

तमिल नाडु और केरल के बीच पेरियार नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मुल्लापेरियार बांध का ये मुद्दा पिछले दिनों काफी सुर्खियों में रहा है.

वहीं पिछले हफ्ते तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसदों ने पृथक तेलंगाना को लेकर भी संसद में ज़ोरशोर से नारे लगाए थे, और ये आज भी जारी रहा.

भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक, जजों के ख़िलाफ शिकायत के प्रावधान करने वाला न्यायिक उत्तरदायित्व विधेयक और व्हिसलब्लोअर बिल समेत कई विधेयक संसद की कार्रवाही शुरू होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

अपुष्ट ख़बरों के मुताबिक इसी लक्ष्य के साथ, सभी दलों में आम सहमति बनाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे.

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