एफडीआई पर घिरी सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

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Image caption आम सहमति बनाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

रिटेल क्षेत्र में 51 फ़ीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानि एफडीआई के फ़ैसले पर केंद्र सरकार बुरी तरह घिर गई है. विपक्ष तो विपक्ष सरकार के सहयोगी दल भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं.

इस भारी विरोध को देखते हुए और संसद में बने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार ने मंगलवार को इस मसले पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है

एफडीआई को लेकर सोमवार को प्रधानमंत्री आवास पर एक बैठक हुई. कांग्रेस कोर ग्रुप की इस बैठक में फ़ैसला लिया गया कि सरकार कैबिनेट के फैसले को वापस नहीं लेगी.

इस बैठक में सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और अहमद पटेल मौजूद थे.

सरकार की मुसीबत

सरकार के लिए बड़ी मुसीबत ये है कि उसकी सबसे बड़ी सहयोगी तृणमूल कांग्रेस और डीएमके ने कड़ा विरोध दर्ज किया है.

साथ ही सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी एफडीआई के विरोध में है.

भारतीय जनता पार्टी ,वामपंथी दल, जनता दल युनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल , एआईएडीएमके और बीजू जनता दल समेत तमाम विपक्षी दल सरकार के इस फैसले के विरोध में हैं.

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि मंगलवार से संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके तो एफडीआई के फैसले को सरकार रात में ही वापस ले.

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है. मैंने उनसे कहा था कि यह बैठक सोमवार को ही बुलाई जाए तो ठीक रहेगा क्योंकि 11 बजे संसद की कार्यवाही आरम्भ होती है, इसलिए बैठक जल्दबाज़ी में होगी."

संसद में काम नही

महत्वपूर्ण है जिस दिन से संसद का शीतकालीन सत्र आरम्भ हुआ है उस दिन से अब तक एक भी दिन किसी भी सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी है.

महंगाई, काला धन, पृथक तेलंगाना राज्य और अब विदेशी पूंजी निवेश विरोध का केन्द्र रहे हैं.

एफडीआई के मुद्दे पर हंगामे के कारण सोमवार को संसद की बैठक के स्थगन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ परामर्श किया और फिर मंगलवार को सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला हुआ.

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