एफ़डीआई पर गतिरोध जारी, कांग्रेस की सफ़ाई

प्रणब मुखर्जी (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Press Information Bureau
Image caption प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कॉग्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी इस मुद्दे पर अलग से मुलाक़ात की.

खुदरा व्यापार क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर गतिरोध जारी है. लेकिन कांग्रेस ने सफ़ाई देते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर पार्टी में किसी तरह का मतभेद नहीं है और पार्टी पूरी तरह सरकार के साथ है.

बुधवार को कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, ''यह फ़ैसला पार्टी की सोची समझी रणनीति का नतीजा है. इससे बेरोज़गारी नहीं बढ़ेगी. विपक्ष केवल हो-हल्ला कर रहा है.''

मनीष तिवारी का ये बयान इसलिए अहम है क्योंकि इस तरह की ख़बरें आ रही थीं कि खुदरा व्यापार क्षेत्र में 51 फ़ीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाज़त दिए जाने के फ़ैसले पर स्वंय कांग्रेस पार्टी के अंदर भी मतभेद हैं.

केरल कांग्रेस के अध्यक्ष रमेश चेन्नीथला ने मंगलवार को बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा था कि इस मुद्दे पर वो सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हैं और उन्होंने इस विषय में प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी भी लिखी है.

उनके अलावा कांग्रेस के ही एक और सांसद संजय सिंह ने भी सरकार के फ़ैसले का विरोध किया था.

इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी के भीतर विरोध के कुछ स्वर उठने के अलावा यूपीए के दो प्रमुख घटक दल तृणमूल कांग्रेस और डीएमके भी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहें हैं.

बेनतीजा बैठक

इस मुद्दे पर बुधवार को कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हुई लेकिन ख़बरों के मुताबिक़ इसका कोई ख़ास नतीजा नहीं निकल सका.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निवास पर क़रीब एक घंटे तक चली बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी हिस्सा लिया.

बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी, गृह मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल भी मौजूद थे.

इससे पहले बुधवार की सुबह कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई जिसमें वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सांसदों को खुदरा व्यापार क्षेत्र में एफ़डीआई की इजाज़त दिए जाने के फ़ैसले के बारे में सरकार के पक्ष से अवगत कराया.

बैठक के बाद संसद भवन परिसर में क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने कहा, ''सरकार और पार्टी का रुख़ एक है, इसी रुख़ के साथ हम विपक्ष तक पहुंच रहे हैं.''

सरकार के इन दावों के बावजूद लगातार सातवें दिन भी संसद नहीं चली और कार्यवाही स्थगित कर दी गई.

संसद का शीतकालीन सत्र 22 नवंबर से शुरू होने के बाद पिछले चार दिनों से एफ़डीआई के मुद्दे पर तथा उससे पहले कई अन्य मुद्दों पर हंगामे के कारण दोनों सदनों में अभी तक कोई काम नहीं हो पाया है.

सरकार और विपक्ष के बीच औपचारिक और पिछले दरवाज़े से हो रही वार्ताओं के बावजूद अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लग सकी है और बुधवार को भी संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा को एक बार के स्थगन के पश्चात दोपहर बारह बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया.

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