अब अन्ना के निशाने पर राहुल गांधी

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Image caption अन्ना हज़ारे ने कहा है कि सरकार में तालमेल की कमी दिखती है

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने आरोप लगाया है कि निचले स्तर के कर्मचारियों और सीबीआई को लोकपाल के दायरे से बाहर करने का क़दम कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के कहने पर उठाया गया है.

शुक्रवार को उन्होंने कहा कि खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) के मामले को सुलझाने में सरकार जानबूझ कर देरी कर रही है जिससे कि उसे बहाना मिल सके कि इसकी वजह से लोकपाल विधेयक शीतकालीन सत्र में पारित नहीं हो सका.

अन्ना हज़ारे ने सरकार पर संसद और प्रधानमंत्री की ओर से दिए गए आश्वासन से मुकर जाने का आरोप लगाया.

उनका कहना था कि संसद और प्रधानमंत्री ने निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाए जाने, सिटीज़न्स चार्टर लागू करने और राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति एक केंद्रीय क़ानून के ज़रिए करने का आश्वासन दिया था.

अन्ना हज़ारे ये घोषणा पहले ही कर चुके हैं कि यदि शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक पारित नहीं हुआ तो वे फिर से अनशन करेंगे.

एक सख़्त लोकपाल क़ानून की मांग को लेकर अन्ना हज़ारे दो बार अनशन कर चुके हैं और दोनों ही बार आख़िरकार सरकार को झुकना पड़ा था.

आरोप

पहले ये ख़बरें आईं थी कि संसद की स्थाई समिति ने सी ग्रुप के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में रखने की सिफ़ारिश की है.

लेकिन गुरुवार को मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि स्थाई समिति ने अपने इस फ़ैसले को पलट दिया है और सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति के लिए भी एक अलग ढाँचा बनाने की सिफ़ारिश की है.

इन ख़बरों से नाराज़ अन्ना हज़ारे ने पत्रकारों से कहा, "मुझे लगता है कि सरकार में कोई तालमेल नहीं है. पहले स्थाई समिति ने एक निर्णय ले लिया था. अब लगता है कि राहुल गांधी ने ही उन्हें निर्देश दिए हैं कि सी और डी ग्रुप के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से हटा लिया जाए. यदि आप उन्हें लोकपाल के दायरे में नहीं रखेंगे तो जनता आपको सबक सिखाएगी."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "हो सकता है कि स्थाई समिति के कांग्रेस सदस्यों को फ़ोन करके राहुल गांधी ने कहा हो कि निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल से हटा दो. ये मेरा अनुमान है. आप जानते हैं कि जहाँ आग होती है वहीं धुँआ होता है. कई बार आग दिखाई नहीं देती बस."

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Image caption जब राहुल गांधी ने लोकपाल को संवैधानिक संस्था बनाने का सुझाव दिया था तब भी टीम अन्ना ने इसे टालने का तरीक़ा कहा था

इस क़दम को उन्होंने 'पूरे देश के साथ धोखा' क़रार दिया है.

उनका कहना था कि एक ओर प्रधानमंत्री कहते हैं कि वो भ्रष्टाचार को दूर करना चाहते हैं लेकिन दूसरी ओर कहते हैं कि ग्रुप सी और डी के कर्मचारी लोकपाल के दायरे में नहीं आएँगे.

अन्ना हज़ारे ने कहा कि इसके लिए न तो अतिरिक्त पैसे ख़र्च करने पड़ेंगे और न अतिरिक्त कर्मचारियों की ज़रुरत होगी.

उनका कहना था कि वे चाहते हैं कि सीबीआई को भी सरकार के दायरे से हटाकर स्वायत्त संस्था बना दिया जाए.

लोकपाल के संवैधानिक संस्था बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे इसके ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन इसमें सरकारी दखलंदाज़ी नहीं होनी चाहिए.

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