भारतीयों के पास 950 अरब डॉलर का सोना!

सोना
Image caption शोध के मुताबिक़ भारत के घरानों में 18,000 टन सोना जमा है, जो वैश्विक स्टॉक का 11 प्रतिशत है.

भारत में एक कहावत मशहूर है कि ‘बुरे वक़्त में सोना काम आता है.’ जहां बुरे वक़्त में सोना काम आता है, वहीं शुभ घड़ी का आग़ाज़ भी भारत में सोने से ही किया जाता है.

गोल्ड काउंसिल ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ भारत में 50 प्रतिशत से ज़्यादा सोना शादी-ब्याह के मौक़े पर ख़रीदा जाता है.

सोने के साथ भारतीयों का रिश्ता अनमोल रहा है और इसका प्रमाण इसी बात में है कि इस साल सोने के दाम आसमान छूने के बावजूद ख़रीददारों की तादाद में कोई ख़ास कमी दर्ज नहीं की गई.

मैक्वायर नाम के एक वैश्विक शोध संघ के अध्ययन में सामने आया है कि भारतीयों ने अपने घरों में कुल 950 अरब डॉलर का सोना जमा कर रखा है, जो डॉलर के मूल्य-वर्ग के हिसाब से भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 50 प्रतिशत के बराबर है.

ये बात सुनकर शायद ही किसी को कोई आश्चर्य हो, क्योंकि भारत सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है.

शोध के मुताबिक़ भारत के घरों में 18,000 टन सोना जमा है, जो वैश्विक स्टॉक का 11 प्रतिशत है.

मैक्वायर के मुताबिक़ 2009-10 में भारत की सात से आठ प्रतिशत की बचत सोने के रूप में लोगों के घरों में जमा थी.

बैंक बनाम सोना

Image caption भारतीय लोग बैंकों में पैसा जमा करने के बजाय सोने में निवेश करना ज़्यादा पसंद करते हैं.

चांदनी चौक के दरीबा कलां में सोना ख़रीद रहे लोगों से जब पूछा गया कि वे सोने में निवेश करने के बजाय बैंकों में पैसे जमा करना क्यों नहीं पसंद करते, तो वहां बैठी एक महिला ने फट से जवाब दिया, “बैंक में जमा किए जाने वाले पैसे को आभूषणों की तरह पहना तो नहीं जा सकता. सोना तो ऐसी चीज़ है जिसे मैं अपनी साड़ी से मैच करके भी पहन सकती हूं और जब बुरा वक़्त आए तो इसे काम में ला सकती हूं. तो फिर बैंक में पैसा क्यों जमा करना?”

तो दूसरी ओर पास ही में बैठे एक व्यापारी का कहना था, "अगर म्युचुअल फ़ंड में निवेश करते हैं, तो हमेशा रिस्क बना रहता है, और जहां तक बैंक का सवाल है तो वहां भी ब्याज दर ऊपर नीचे होती रहती है. लेकिन सोना एक ऐसा धातु है जिसका मूल्य बढ़ेगा ही बढ़ेगा. यही कारण है कि हिंदुस्तान के लोग इस पीले धातु में ज़्यादा विश्वास रखते हैं."

वहीं जौहरियों का भी कहना है कि भारतीयों को सोने में निवेश करना सबसे ज़्यादा सुरक्षित माध्यम लगता है और आजकल लोग जितना आभूषणों में ख़र्च करते हैं, उतना ही सोने के बिस्कुटों और सिक्कों में निवेश करते हैं.

चांदनी चौक में श्री राम हरी राम ज्वेलर्स के मालिक प्रदीप गुप्ता का कहना है, "मेरी दुकान पर सोने की जितनी बिक्री होती है, उसमें से 50 प्रतिशत आभूषण होते हैं, और बाक़ी 50 प्रतिशत बिस्कुट और सिक्के होते हैं. और फिर जितना रिटर्न बैंक में जमा किए पैसे पर मिलता है, उससे कहीं ज़्यादा सोने की बिक्री से मिलता है."

हालांकि दूसरी ओर मैक्वायर का ये भी कहना है कि भारतीय सोने के आभूषणों को बेचने से कतराते हैं, क्योंकि ऐसा करना अशुभ माना जाता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ जनवरी 2010 और सितंबर 2011 के बीच सोने के दामों में 64 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई, लेकिन फिर भी इस कीमती धातु की पकड़ मज़बूत बनी हुई है.

हालांकि सितंबर 2011 में रुपए के मूल्य में आई गिरावट के बाद सोने की मांग में 23 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. मैक्वायर के मुताबिक़ इसकी एक वजह ये भी थी कि हिंदू कैलंडर के मुताबिक़ ये अशुभ समय था.

रिपोर्ट ये भी कहती है कि सोने की ज़्यादा खपत के कारण रुपए के मूल्य में गिरावट आ रही है.

हालांकि मैक्वायर का ये भी कहना है कि मूल्य के हिसाब से भारत आज भी विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता है.

तेल और पूंजीगत सामग्री के बाद भारत में सोने का आयात सबसे ज़्यादा होता है. 2010 में भारत में करीब 92 प्रतिशत सोना आयात किया गया था.

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