सर्वदलीय बैठक में संसद चलाने पर सहमति

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Image caption एफडीआई के मुद्दे पर प्रणब मुखर्जी आम सहमति बनाने की कोशिश में हैं.

खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्षी दलों के बीच संसद की कार्यवाही सामान्य रुप से चलाने पर सहमति हुई है.

एफडीआई के मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में विदेशी निवेश के फ़ैसले को फिलहाल रोक लगाने और आम सहमति बनाने पर रज़ामंदी हुई है.

बैठक के बारे में अधिक जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन नेताओं ने कहा है कि विभिन्न पक्षों के बीच संसद की कार्यवाही चलाने पर सहमति बनी है.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संसद में कहा कि शीत सत्र खत्म होने में मात्र 10 दिन बचे हैं और सरकार सभी पक्षों से बातचीत के बाद कोई फ़ैसला लेगी.

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज का कहना था कि जनभावनाओं की बात सुनना सरकार की हार नहीं होती बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करता है

उल्लेखनीय है कि एफडीआई के मुद्दे पर पिछले कई दिनों से संसद की कार्यवाही ठप पड़ी रही थी क्योंकि विपक्षी दल इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाना चाहते थे.

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने संवाददाताओं से कहा, '' हम संसदीय लोकतंत्र का हिस्सा है और हर काम आपसी बातचीत और सहमति से होता है. सरकार ने तय किया है कि एफडीआई के मुद्दे पर सभी दलों के बीच एक आम सहमति बनाई जाए और उसके बाद इस फ़ैसले को आगे बढ़ाया जाए.''

नेशनल कांफ्रेंस के नेता फ़ारुख अब्दुल्ला ने बैठक से निकलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, '' कोई फ़ैसला वापस लेने पर बात नहीं हुई है. एफडीआई लाने के फ़ैसले को फिलहाल रोका गया है.लेकिन सभी दल इस बात पर सहमत हुए हैं कि संसद की कार्यवाही चले और ये बड़ी बात है.''

बैठक से पहले ही माना जा रहा था कि सरकार एफडीआई के मुद्दे पर फ़ैसले को फिलहाल रोक देगी और आगे इस पर आम सहमति बनाने की कोशिश जारी रखेगी.

वाम दलों के नेता गुरुदास दासगुप्ता का कहना था, '' एफडीआई के मुद्दे पर ये तय हुआ है कि आम सहमति बनाई जाएगी और तब तक यह फैसला लागू नहीं किया जाएगा. इस मुद्दे पर सरकार को सभी से बात करनी होगी. इस बात पर सभी दल राज़ी हुए हैं.''

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Image caption ममता ने एफडीआई का कड़ा विरोध किया है.

इस मुद्दे पर विपक्ष ने कड़ा रुख अपना रखा है लेकिन सरकार का कहना है कि वो इस मुद्दे पर जल्दबाज़ी में नहीं है.

एफ़डीआई के मुद्दे पर लगातार कई दिनों से संसद की कार्यवाही ठीक से नहीं चलने के कारण सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी.

वैसे बीजेपी के कुछ सहयोगी दल एफ़डीआई पर अलग रुख़ रखते हैं. मसलन अकाली दल ने एफ़डीआई का समर्थन किया है.

कुछ कांग्रेस सांसदों ने भी एफ़डीआई का कड़ा विरोध किया है.

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