'चिदंबरम को इस्तीफ़ा देने की ज़रूरत नहीं'

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Image caption पी चिदंबरम वर्ष 2008 में वित्त मंत्री थे, जब 2-जी स्पैक्ट्रम का आबंटन किया गया था.

टू-जी आवंटन मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम की भूमिका पर सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका मंज़ूर होने के बाद क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने कहा है कि विपक्ष की ये मांग सही नहीं है कि चिदंबरम इस्तीफ़ा दें.

खुर्शीद ने कहा, "अदालत ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं कहा है जिससे पता चले कि पी चिदंबरम के ख़िलाफ़ कोई मामला बनता है या नहीं, इसलिए उनको इस्तीफ़ा देने की कोई ज़रूरत नहीं है"

गुरुवार को टू-जी मामले की जांच कर रही विशेष अदालत में जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई थी. स्वामी का आरोप है कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम स्पेक्ट्रम की क़ीमत तय करने के मामले में ए राजा की साज़िश में भागीदार थे.

अदालत ने सुनवाई के बाद पी चिदंबरम की याचिका पर सीधे तौर पर कुछ ना कहते हुए पहले याचिकाकर्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी से 17 दिसंबर को अदालत के समक्ष अन्य अधिकारियों को गवाह बनाने से पहले अपना पक्ष रखने को कहा है.

अदालत के आदेश के बाद विपक्ष ने पी चिदंबरम के इस्तीफ़े की मांग तेज़ कर दी है.

संसद में विरोध

गुरवार को ससंद में इस मामले की गूँज सुनाई दी. वैसे संसद के शीतकालीन सत्र के शुरू होने से पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने चिंदबरम के इस्तीफ़े की मांग की थी और संसद में उनका बहिष्कार करने का ऐलान किया था.

गुरूवार सुबह भी जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने गृहमंत्री के इस्तीफ़े की मांग शुरू कर दी. एआईएडीएमके के सांसद भी इस विरोध में जुड़ गए और स्पीकर की कुर्सी के नज़दीक आ गए.

लोकसभा में भारी हंगामे की वजह से स्पीकर ने पहले 12 बजे और फिर दो बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.

राज्य सभा में भी गृह मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई.

वहीं अदालत से बाहर आकर सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पत्रकारों से कहा, "अदालत के आदेश से मैं बहुत ख़ुश हूँ क्योंकि इससे याचिका की सुनवाई की प्रक्रिया में तेज़ी आई है."

यानी अगली सुनवाई में स्वामी गवाह के तौर पर पेश होकर अदालत को ये समझाने का प्रयास करेंगे कि तत्कालीन वित्त मंत्री के ख़िलाफ़ उनके आरोप साबित करने के लिए दो अहम गवाहों को अदालत में बुलाने की ज़रूरत क्यों है.

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक अवस्थी और वित्त मंत्रालय की पूर्व कर्मचारी सिंधुश्री खुल्लर को गवाह के तौर पर बुलाए जाने की दरख़्वास्त की है.

अगर अदालत स्वामी की गवाही से ऐसा ज़रूरी समझे तो अवस्थी और सिंधुश्री खुल्लर को बुलाने की अनुमति देगी. फिर उनकी गवाही के आधार पर ही चिदंबबरम वाली याचिका पर विचार किया जाएगा.

लेकिन स्वामी के मुताबिक़ अगर 17 तारीख को अदालत को उनकी गवाही ही काफ़ी लगी, तो अदालत सीधे पी चिदंबरम के ख़िलाफ याचिका पर विचार कर सकती है.

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ये याचिका वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के मंत्रालय से प्रधानमंत्री के दफ़्तर को लिखी गई एक चिट्ठी के सामने आने पर डाली थी. इस चिट्ठी में मोबाइल कंपनियों को टू-जी लाइसेंस दिए जाने के मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं.

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