अस्पताल अग्निकांड, 'हत्या' का मामला दर्ज

 शनिवार, 10 दिसंबर, 2011 को 06:42 IST तक के समाचार

कोलकाता के एक निजी अस्पताल में लगी आग के मामले में पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में ले लिया है और उनके ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता के भीतर लापरवाही और सदोष मानवहत्या का मामला दर्ज किया गया है.

कोलकाता से बीबीसी के पश्चिम बंगाल संवाददाता अमिताभ भट्टासाली का कहना है कि एएमआरआई अस्पताल के सात अधिकारियों को, जो ख़ुद ही पुलिस के सामने पेश हुए थे, शनिवार को अदालत के सामने पेश किया जाएगा.

इस बीच शुक्रवार तड़के हुए इस हादसे में अब तक 90 लोगों की मौत हो चुकी है. मारे जाने वालों में अस्पताल के चंद कार्मचारी भी शामिल हैं.

इस हादसे को देश का सबसे बड़ा अस्पताल हादसा बताया जा रहा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मरने वालों की तादाद में और बढ़ोतरी हो सकती है.

नाज़ुक

फ़ायर ब्रिगेड का बचाव दल जिन मरीज़ों को अस्पताल से बाहर निकालने में कामयाब हुआ है उनमें से कई की स्थिति नाज़ुक बताई जा रही है.

सख़्त कार्रवाई

"जैसा कि मैंने कहा था कि घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों को गिरफ़्तार किया जाएगा, छह लोगों को जिसमें एसके टोडी भी शामिल हैं हिरासत में लिया गया है. क़ानून अपना काम करेगा. जो लोग इतनी मौतों के लिए ज़िम्मेदार हैं उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."

ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री

इन लोगों का इलाज शहर के दूसरे अस्पतालों में जारी है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है, "जैसा कि मैंने कहा था कि घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों को गिरफ़्तार किया जाएगा, सात लोगों को जिसमें एसके टोडी भी शामिल हैं हिरासत में लिया गया है. क़ानून अपना काम करेगा. जो लोग इतनी मौतों के लिए ज़िम्मेदार हैं उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."

ममता बनर्जी ने कहा कि पुलिस, अग्निश्मन सेवा, कोलकाता नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक उच्च-स्तरीय समीति का गठन किया गया है जो इस घटना की जांच करेगा.

अधिकारियों ने अस्पताल का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है.

फ़ॉरेंसिक टीम

इस बीच अस्पताल के बेसमेंट में जाकर साक्ष्य जुटाने की कोशिश करने वाली एक फॉरेंसिक टीम को यूं ही वापस लौटना पड़ा क्योंकि वह क्षेत्र पानी से भरा था.

अस्पताल अग्निकांड

फॉयर ब्रिगेड के लोगों ने मरीज़ों को रस्सियों के सहारे नीचे उतारा.

अबतक सामने आई ख़बरों के आधार पर कहा जा रहा है कि आग की शुरूआत बेसमेंट से हुई.

एएमआरआई अस्पताल ने बेसमेंट, पार्किंग के नाम पर बनाया था लेकिन कहा जा रहा है कि उसका इस्तेमाल स्टोर रूम के तौर पर किया जा रहा था.

अधिकारियों ने दावा किया है कि दमकल विभाग ने अस्पताल को कुछ महीनों पहले ही चेतावनी दी थी और कहा था कि इमारत में अग्निशमन के पर्याप्त उपाय नहीं है और न ही वो नियामकों के अनुसार है.

उनका कहना था कि अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन के बावजूद इसमें कोई सुधार नहीं किया.

हालांकि अस्पताल के एक उच्च अधिकारी ने कहा है कि वहां आग से निपटने के सभी उपाय किए गए थे और इनका निरीक्षण भी समय-समय पर किया जाता था.

लेकिन मारे जानेवालों के परिजनों का कहना है कि जब आग लगी तो अस्पताल के सभी अधिकारी वहां से भाग गए और कोई भी मरीज़ों की मदद को नहीं आया.

मारे जाने वाले ज़्यादातर लोग ज़हरीले धुंए का शिकार बताए जा रहे हैं.

मरनेवालों में ज़्यादातर मरीज़ थे जो अस्पताल में ऊपर की मंजिलों में फंस गए थे जिनका आग की लपटों और धुएं के कारण दम घुट गया.

अवैध

पश्चिम बंगाल में अग्निशमन मंत्री जावेद अहमद खान ने बीबीसी से कहा है अस्पताल ने आग लगने के बावजूद फ़ायर ब्रिगेड को इसकी ख़बर नहीं दी थी.

कोलकाता अस्पताल अग्निकांड

गंभीर रूप से बीमार मरीज़ बिस्तर पर ही फंसे रह गए.

उनका कहना था कि दमकल विभाग को इसकी ख़बर पुलिस से मिली.

जावेद ख़ान ने कहा कि आग की शुरुआत अस्पताल के तहख़ाने से हुई. यह तहख़ाना ''पूरी तरह अवैध है.''

अस्पताल पर आकस्मिक स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई भी रास्ता न होने के आरोप भी लग रहे हैं.

अग्निशमन कर्मचारियों को मरीज़ों को निकालने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े. काफ़ी मरीज़ों को रस्सियों के सहारे ऊपर के तलों से नीचे उतारा गया

इनमें से कई पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थे. इस पूरी घटना के कारण उनकी स्थिति और बिगड़ गई है.

अस्पताल ने मृत्कों के परिवार को पांच लाख रूपए के मुआवज़े और घायलों के मुफ़्त इलाज की घोषणा की है.

प्रधानमंत्री ने इस मामले पर गहरा दुख जताया है और घोषणा की है कि मारे जाने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रूपए और घायलों को पचास हज़ार रूपए मुआवज़े के तौर पर दिया जाएगा.

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