लोकपाल का मसौदा संसद में, स्वेच्छा से कार्रवाई का प्रावधान

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Image caption सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने सरकार से लोकपाल विधेयक को शीतकालीन सत्र में पारित किए जाने की मांग की है.

संसद के दोनों सदनों में लोकपाल विधेयक के मसौदे पर स्थाई समिति की रिपोर्ट पेश करने के बाद समिति के अध्यक्ष, अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि रिपोर्ट में लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की पैरवी की गई है.

एक पत्रकार वार्ता में रिपोर्ट की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया, “हमने कई ऐतिहासिक प्रस्ताव रखे हैं, जैसे लोकपाल को अभियोजन प्रक्रिया शुरू करने के लिए किसी भी तरह की पूर्व-अनुमति नहीं चाहिए होगी और साथ ही सीबीआई की तहक़ीक़ात और लोकपाल की अभियोजन प्रक्रिया अलग-अलग होंगी”.

मनु सिंघवी ने कहा कि लोकपाल के चुनाव के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायधीश, लोकसभा के अध्यक्ष और लोकसभा में नेता विपक्ष के अलावा एक चौथा व्यक्ति भी होगा.

इस व्यक्ति को संसदीय ओहदों पर नियुक्त अधिकारी – मुख्य चुनाव आयुक्त, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष नामांकित करेंगे.

चयन समिति में महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए 50 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान रखने की मांग भी की गई है.

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रिपोर्ट में लोकपाल और राज्यों के लोकायुक्तों को एक ही क़ानून के दायरे में लाने का प्रस्ताव भी रखा गया है.

लोकपाल का दायरा

प्रधानमंत्री के लोकपाल में शामिल होने पर तीन विकल्प सुझाए गए हैं – लोकपाल के दायरे में लेकिन सुरक्षा के प्रावधानों के साथ, लोकपाल के दायरे में लेकिन अभियोजन प्रक्रिया पद छोड़ने के बाद ही, लोकपाल के दायरे से बाहर.

सिटीज़न्स चार्टर और नागरिकों की शिकायत दूर करने की प्रणाली लोकपाल के दायरे में ना हो और उसे भी संवैधानिक दर्जा मिले.

न्यायपालिका लोकपाल के दायरे से बाहर होगी, उसके लिए एक अलग राष्ट्रीय न्यायपालिका आयोग बनाया जाए.

संसद की परिधि में सांसदों के व्यवहार और आचार पर पहले से ही संविधान में नियम होने की वजह से, उसे लोकपाल से बाहर रखा जाए.

मीडिया, निजी कंपनियां और ग़ैर-सरकारी संगठन भी लोकपाल के दायरे से बाहर होंगे. लेकिन दस लाख से ज़्यादा आर्थिक मदद पाने वाले बड़े स्वयंसेवी संगठन इसके दायरे में होंगे.

कैसे होगी कार्रवाई?

भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई में सीबीआई, सीवीसी और लोकपाल तीनों की भूमिका होगी.

शिकायत सबसे पहले एक शुरुआती जांच के लिए लोकपाल के पास जाएगी. शिकायत को सही जानने पर लोकपाल इसकी तहक़ीक़ात के लिए इसे सीबीआई के पास भेजेगा.

किसी भी मामले की जांच के दौरान सीबीआई की संबंधित मंत्रालय और लोकपाल के प्रति कोई जवाबदेही नहीं होगी.

सीबीआई की जांच के बाद ये लोकपाल की अभियोजन शाखा के पास जाएगी. जो इसे सज़ा की प्रक्रिया के लिए विशेष अदालत के पास भेजेगी.

विभागीय जांच के लिए ‘ए’ एवं ‘बी’ वर्ग के सरकारी मुलाज़िमों के ख़िलाफ शिकायतों पर लोकपाल के सुझाव बाध्यकारी होंगे (अगर तीन राज्य मंत्री इसका विरोध ना करें तो).

‘सी’ वर्ग के सरकारी मुलाज़िमों के ख़िलाफ शिकायतें मुख्य सतर्कता आयोग (सीवीसी) देखेगा. आयोग हर तीन महीने में इसकी रिपोर्ट लोकपाल को देगा.

व्हिसलब्लोअर यानि पर्दाफ़ाश करनेवालों पर और फोन-टैपिंग जैसे मुद्दों पर मौजूदा प्रावधान ही लोकपाल पर भी लागू होंगे.

लोकपाल को झूठी शिकायत करने पर दी जाने वाली सज़ा को कम किया गया है.

क़ानून बनने की प्रक्रिया

पिछले क़रीब ढाई महीनों में स्थाई समिति में 14 राजनीतिक पार्टियों के 30 सदस्यों ने 24 मुद्दों पर चर्चा की जिनमें से 13 मुद्दों पर पूर्ण सहमति थी.

इस रिपोर्ट पर अब मंत्रिमंडल चर्चा करेगा. मंत्रिमंडल को रिपोर्ट में दिए गए किसी भी प्रस्ताव को नामंज़ूर करने की छूट होगी.

माने गए प्रस्तावों के साथ संसद में पहले ही पेश हो चुके लोकपाल विधेयक में संशोधन किए जाएंगे और मंत्रिमंडल द्वारा उसे दोबारा सदन के पटल पर रखा जाएगा.

जिसके बाद संसद उसपर मतदान कर लोकपाल क़ानून बनाएगा.

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